सुरेश कलमाड़ी का सफर: भारतीय वायुसेना के पायलट से भारत के सबसे ताकतवर खेल प्रशासक तक

भारतीय खेल प्रशासन के दिग्गज सुरेश कलमाड़ी का जीवन परिचय। IAF पायलट से IOA अध्यक्ष बनने तक का सफर, उपलब्धियां, विवाद और विरासत - पढ़ें पूरी कहानी।

Suresh Kalmadi Of Biography: भारतीय खेल जगत में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों की वजह से भी इतिहास में जगह बनाई। सुरेश कलमाड़ी (Suresh Kalmadi) ऐसा ही एक नाम हैं।

Suresh Kalmadi Of Biography
Suresh Kalmadi Of Biography

संसाधन जुटाने में माहिर, प्रभावशाली लेकिन विवादों से घिरे कलमाड़ी ने दो दशकों से अधिक समय तक भारतीय खेल प्रशासन को दिशा दी। भारतीय वायुसेना के पायलट से लेकर इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अध्यक्ष बनने तक उनका सफर उपलब्धियों और आरोपों का मिला-जुला रूप रहा।

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वायुसेना से राजनीति तक का सफर

IAF पायलट से सांसद बनने की कहानी

1944 में मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मे सुरेश कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पढ़ाई की। खेल और प्रशासन से पहले उनका करियर भारतीय वायुसेना (IAF) से जुड़ा रहा। 1964 से 1974 तक उन्होंने वायुसेना में सेवा दी, जहां वे पहले एक कमीशंड पायलट और बाद में इंस्ट्रक्टर बने। वे स्क्वाड्रन लीडर (Squadron Leader) के पद से सेवानिवृत्त हुए। राजनीति में उनकी एंट्री शरद पवार के मार्गदर्शन में हुई। बाद में वे यूथ कांग्रेस के पुणे अध्यक्ष बने और संजय गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी माने गए।
कलमाड़ी चार बार राज्यसभा सांसद चुने गए और 1995 में पीवी नरसिंह राव सरकार (PV Narasimha Rao government) में रेल राज्य मंत्री भी रहे।

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भारतीय खेल प्रशासन में उदय

IOA और एथलेटिक्स में कलमाड़ी की मजबूत पकड़

राजनीति से ज्यादा पहचान उन्हें भारतीय खेल प्रशासन में मिली। 1996 से 2011 तक वे इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अध्यक्ष रहे।
उन्होंने भारत में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को लाने में अहम भूमिका निभाई, जिनमें शामिल हैं:

  • 2003 अफ्रो-एशियन गेम्स
  • 2008 कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स
  • 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स
  • एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप (1989, 2013)

वे 1987 से 2006 तक एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान भारत में अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स को नई पहचान मिली। दिल्ली में इंटरनेशनल ट्रैक मीट, पुणे इंटरनेशनल मैराथन और एशियन ग्रां प्री एथलेटिक्स जैसे आयोजनों में उनकी अहम भूमिका रही।

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विवाद, गिरफ़्तारी और विरासत

CWG घोटाला और कलमाड़ी की मिली-जुली विरासत

साल 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स कलमाड़ी के करियर का सबसे विवादित अध्याय साबित हुए। आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे और वे गिरफ़्तार भी हुए। हालांकि, अप्रैल 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर उन्हें क्लीन चिट दी।

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इसके बावजूद, CWG विवाद ने उनकी छवि को गहरी चोट पहुंचाई। वे मीडिया बहसों और जन आक्रोश के केंद्र में रहे।
फिर भी, खेल जगत में उनके योगदान को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उनके कार्यकाल में ही भारत ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में अपना पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता, जब अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने इतिहास रचा।

उपलब्धियां और सम्मान

  • एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष (2001)
  • वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल के पहले भारतीय सदस्य। 
  • 2008 बीजिंग में CANOC अवॉर्ड से सम्मानित। 
  • नेशनल गेम्स को नियमित आयोजन की राह पर लाया। 

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