Share Market: बाजार में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव, Nifty फिसला, Sensex भी लुढ़का! क्या अब 26,000 है अगला लक्ष्य?
शुरुआाती कारोबार में निफ्टी आईटी और ऑयल एंड गैस जैसे सूचकांक लाल निशान में रहे। वहीं, ऑटो, एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रीयल्टी और मेटल जैसे सेक्टर में मामूली तेजी देखी गई।
Share Market Today: घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को भी बिकवाली का दौर जारी रहा।

निवेशकों में सतर्कता और कमजोर मनोबल के चलते दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले। यह कमजोर शुरुआात सोमवार को बाजार के नकारात्मक बंद होने के बाद आई है, जब कुछ भारी-भरकम शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
खुलने के आंकड़े:
निफ्टी 50 सूचकांक 26,189.70 के स्तर पर खुला, जो 60.60 अंक यानी 0.23% की गिरावट दर्शाता है। बीएसई सेंसेक्स 85,331.14 के स्तर पर शुरुआात करते हुए 108.48 अंक यानी 0.13% टूटा।
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क्यों डरे हुए हैं निवेशक?
बैंकिंग एवं बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने बताया कि सोमवार को बाजार ने दिन में उछाल तो देखा, लेकिन उसे बरकरार नहीं रख सका। आईटी, तेल और गैस क्षेत्र के साथ-साथ कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली से दिन नकारात्मक रहा। उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) का रुख अभी भी अस्थिर है, जो बाजार को प्रभावित कर रहा है।
किस सेक्टर में क्या रहा रुख?
शुरुआाती कारोबार में निफ्टी आईटी और ऑयल एंड गैस जैसे सूचकांक लाल निशान में रहे। वहीं, ऑटो, एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रीयल्टी और मेटल जैसे सेक्टर में मामूली तेजी देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी दिखी, लेकिन बड़ी कंपनियों के शेयर (लार्ज-कैप) दबाव में नजर आए।
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विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. का कहना है कि बाजार का ध्यान अब तिमाही नतीजों (Q3 Earnings) की ओर होगा। निफ्टी 50 अभी छोटी अवधि के समेकन में है, लेकिन 26,000-26,050 का स्तर इसके लिए एक मजबूत सहारा बना हुआ है।
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वैश्विक बाजारों का हाल:
वैश्विक स्तर पर संकेत मिला-जुले थे। ज्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी रही, खासकर रक्षा और प्रौद्योगिकी शेयरों में। अमेरिकी शेयर बाजार के सूचकांक भी हरे निशान में थे। सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त जारी रही, जो निवेशकों का सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुझान दिखाता है। तेल की कीमतों में गिरावट रही।
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आगे क्या देखना होगा?
इस सप्ताह बाद में जारी होने वाले अमेरिकी रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े बाजार के लिए अहम होंगे। इनसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना के अनुमान प्रभावित होंगे, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा।



