Rewa:जब कुर्सी की बजाय जमीन पर ही बैठ गए नए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी फिर जो हुआ!
रीवा(Rewa) कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) का अनोखा अंदाज, स्कूल में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर पढ़ाई कराई। जानिए पूरा मामला और क्यों वायरल हो रहा है वीडियो।

कहते हैं कि जैसे-जैसे इंसान ऊंचे पद पर पहुंचता है, वह आम लोगों से दूर होता जाता है। लेकिन रीवा में कुछ अलग ही देखने को मिला। यहां नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) ने अपनी पहली ही फील्ड विजिट में उस सोच को गलत साबित कर दिया, जिसे लोग अक्सर सच मान लेते हैं।
जिले की कमान संभालने के बाद जहां आमतौर पर अधिकारी अपने दफ्तर में बैठकर समीक्षा करते हैं, वहीं कलेक्टर सूर्यवंशी ने सीधा रुख किया दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र डाभौरा(Dabhaura) का। यह फैसला ही उनके काम करने के अंदाज को बयां करने के लिए काफी था।
आलीशान कुर्सी नहीं… जमीन बनी ‘कलेक्टर की सीट’
जब कलेक्टर जतरी ग्राम पंचायत के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों ने जो देखा, वह हैरान कर देने वाला था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने किसी विशेष व्यवस्था या कुर्सी की मांग नहीं की।
बल्कि उन्होंने प्रोटोकॉल को पूरी तरह किनारे रखते हुए बच्चों के बीच जमीन पर बैठना ज्यादा उचित समझा।
उनका यह अंदाज किसी अधिकारी का नहीं, बल्कि एक शिक्षक या परिवार के बड़े सदस्य जैसा था। बच्चों के साथ सहज होकर बैठना और उनसे संवाद करना-यही उनकी प्राथमिकता थी।
बच्चों से पढ़वाया पाठ, पहाड़े भी कराए-डर नहीं, दिखी खुशी
स्कूल में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केवल औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि बच्चों की पढ़ाई को खुद परखा।
उन्होंने छात्रा अंतिमा से पाठ पढ़वाया और छात्र उत्तम प्रसाद से 7 का पहाड़ा सुनने को कहा। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर घबराहट नहीं, बल्कि आत्मविश्वास नजर आया।
कलेक्टर ने बच्चों की किताबें देखीं, उनसे उनके विषयों के बारे में बात की और उन्हें पढ़ाई के महत्व को समझाया।
उस पल वहां मौजूद हर व्यक्ति को यह एहसास हुआ कि एक अधिकारी जब शिक्षक की भूमिका में आता है, तो शिक्षा का असली उद्देश्य सामने आता है।
सिर्फ बातें नहीं… दिए सख्त निर्देश भी
कलेक्टर का यह दौरा केवल भावनात्मक नहीं था, बल्कि पूरी तरह एक्शन-ओरिएंटेड भी रहा।
उन्होंने स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जर्जर भवन को हटाकर नए निर्माण का काम जल्द शुरू किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता भी जांची, ताकि बच्चों को सही पोषण मिल सके।
किताबों और साइकिल वितरण की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली गई।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला जरूर कराएं, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘सादगी का वीडियो’
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) का यह अंदाज अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो को देखकर उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
कई यूजर्स ने लिखा कि अगर हर अधिकारी ऐसा सोचने लगे, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
इस वीडियो ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत बड़े फैसलों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कदमों से होती है।
नियत साफ हो तो सिस्टम खुद बदलता है
रीवा(Rewa) कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) की यह पहल केवल एक दौरा नहीं, बल्कि एक संदेश है-कि प्रशासन अगर जमीन से जुड़कर काम करे, तो नतीजे भी जमीनी स्तर पर ही दिखते हैं।
उनकी सादगी और संवेदनशीलता यह बताती है कि असली नेतृत्व वही है, जो लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझे और समाधान की दिशा में काम करे।



