कुर्सी पर बैठते ही रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) ने जो किया, उससे अधिकारियों के छूट गए पसीने!
पदभार संभालते ही एक्शन में आए रीवा(Rewa) के नए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi)। 8 घंटे के भीतर बस में सवार होकर पहुंचे दूरस्थ गांव जतरी। अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

रीवा। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई बड़ा अधिकारी जिले की कमान संभालता है, तो शुरुआती कुछ दिन गुलदस्ते लेने और मुलाकातों के दौर में निकल जाते हैं। लेकिन रीवा(Rewa) के नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) के तेवर कुछ अलग ही हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे ‘एसी कमरों’ वाले साहब नहीं, बल्कि ‘जमीनी हकीकत’ देखने वाले जनसेवक हैं।
पदभार ग्रहण किए अभी ठीक से 8 घंटे भी नहीं बीते थे कि कलेक्टर साहब एक्शन मोड में आ गए। लेकिन चौंकाने वाली बात यह नहीं थी कि वो फील्ड पर निकले, बल्कि चौंकाने वाला था उनके जाने का अंदाज़!
वीआईपी कल्चर को किनारे कर जब बस में सवार हुए कलेक्टर
आमतौर पर कलेक्टर का काफिला जब निकलता है, तो नीली बत्ती (अब सायरन/प्रोटोकॉल) और गाड़ियों की लंबी कतार होती है। लेकिन नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) ने सबको हैरान कर दिया। वे अपनी लग्जरी गाड़ी छोड़, जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर और अन्य अधिकारियों के साथ साधारण बस में सवार होकर निकल पड़े।
कलेक्टर का गंतव्य था जिले का सबसे दूरस्थ इलाका-डाभौरा का जतरी ग्राम पंचायत। रास्ते भर अधिकारी भी इस बात से हैरान थे कि नए साहब का अगला कदम क्या होगा। बस का यह सफर केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश था कि अब काम करने का तरीका बदलने वाला है।

जतरी गांव में सीधा संवाद: जब ग्रामीण और कलेक्टर आए आमने-सामने
जैसे ही बस जतरी गांव पहुंची, वहां हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिले का सबसे बड़ा अधिकारी उनके बीच इस तरह अचानक पहुंच जाएगा। कलेक्टर सूर्यवंशी ने किसी औपचारिक मंच का इंतजार नहीं किया, बल्कि सीधे ग्रामीणों के बीच जा बैठे।
उन्होंने शासन की योजनाओं (Government Schemes) की जमीनी हकीकत जानी। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) ने ग्रामीणों से एक-एक कर पूछा-“क्या आपको राशन मिल रहा है? क्या आवास योजना का लाभ मिला? पेंशन समय पर आ रही है या नहीं?”
इस सीधे संवाद के दौरान कलेक्टर का रुख सख्त भी दिखा और नरम भी। उन्होंने साफ कहा कि योजनाओं की फाइलें केवल दफ्तरों में नहीं दौड़नी चाहिए, उनका असर गरीब के घर के चूल्हे तक दिखना चाहिए।

अधिकारियों को दो टूक: ‘अंतिम छोर तक पहुंचना होगा लाभ’
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) ने मौके पर मौजूद अमले को सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा, “प्रशासन का मतलब केवल आदेश देना नहीं, बल्कि सेवा करना है। अंतिम छोर (Last Mile Delivery) पर बैठे व्यक्ति को अगर योजना का लाभ नहीं मिल रहा, तो अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।”
उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें। अगर कहीं कोई समस्या आती है, तो सीधे अवगत कराएं। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर भी लगातार फीडबैक नोट करते नजर आए।
निष्कर्ष: रीवा को मिला एक ‘एक्शन हीरो’?
मात्र 8 घंटे के भीतर रीवा से डाभौरा के जतरी गांव तक का यह सफर बताता है कि आने वाले दिनों में रीवा प्रशासन की रफ्तार क्या होने वाली है। नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी(Narendra Kumar Suryavanshi) के इस ‘बस दौरे’ ने जिले के सुस्त पड़े सरकारी तंत्र में जान फूंक दी है। अब देखना यह होगा कि साहब का यह तेवर आने वाले समय में जिले की सूरत कितनी बदल पाता है।



