डॉक्टर बाबू अब आपके द्वार! भागलपुर के 120 MBBS छात्रों ने गोद लिए 600 परिवार; 5 साल तक उठाएंगे सेहत का जिम्मा

भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JLNMCH) के एमबीबीएस छात्रों ने 'फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम' के तहत 600 परिवारों को गोद लिया है। जानिए कैसे ये भावी डॉक्टर ग्रामीण स्वास्थ्य की तस्वीर बदल रहे हैं।

Family Adoption Program MBBS Bhagalpur: चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में केवल किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर मरीजों की सेवा करना ही एक असली डॉक्टर की पहचान होती है। इसी संकल्प को चरितार्थ कर रहे हैं बिहार के भागलपुर स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JLNMCH) के एमबीबीएस छात्र। एक अनूठी और मानवीय पहल के तहत, इन भावी डॉक्टरों ने जिले के सुदूर गांवों का रुख किया है और 600 परिवारों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है।

NMC की गाइडलाइन और ‘फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम’ का कमाल

नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब मेडिकल छात्रों को केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहना है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पीएसएम (प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन) विभाग के अध्यक्ष डॉ. कामरान फजल ने बताया कि कॉलेज के 2025-30 बैच के 120 छात्रों ने इस विशेष अभियान की शुरुआत की है। इसे ‘फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम’ का नाम दिया गया है। इसके तहत प्रत्येक छात्र ने जगदीशपुर प्रखंड के मखना गांव के 5-5 परिवारों को गोद लिया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुगम बनाना और छात्रों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। यह जुड़ाव कोई एक-दो दिन का नहीं, बल्कि पूरे 5 साल तक चलेगा, जिससे छात्र और ग्रामीण परिवारों के बीच एक गहरा विश्वास का रिश्ता कायम होगा।

Family Adoption Program MBBS Bhagalpur
Family Adoption Program MBBS Bhagalpur

कुपोषण से जंग और टीकाकरण पर विशेष फोकस

इन एमबीबीएस छात्रों की जिम्मेदारी केवल हाल-चाल लेने तक सीमित नहीं है। छात्र महीने में कम से कम दो बार मखना गांव का दौरा कर रहे हैं। उनके कार्यों की सूची में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं:

  • शिशु स्वास्थ्य: 0 से 5 साल तक के बच्चों के पोषण स्तर की जांच करना और उनके लिए डाइट चार्ट तैयार करना।
  • जागरूकता: बच्चों की माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति शिक्षित करना।
  • टीकाकरण: यह सुनिश्चित करना कि गांव के हर बच्चे को समय पर सभी जरूरी टीके लगें।
  • बुजुर्गों की देखभाल: 30 वर्ष से अधिक उम्र के महिला एवं पुरुषों की नियमित रूप से बीपी (Blood Pressure) और शुगर (Diabetes) की जांच करना।

छात्र न केवल प्राथमिक जांच कर रहे हैं, बल्कि यदि परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमार पाया जाता है, तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आवश्यकता पड़ने पर मायागंज अस्पताल ले जाकर उचित इलाज सुनिश्चित कराने में भी मदद कर रहे हैं।

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ग्रामीण परिवेश में क्लिनिकल हुनर सीख रहे भावी डॉक्टर

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि बीते 13 फरवरी को 120 छात्रों की टीम को बस के जरिए मखना गांव भेजा गया था। इस दौरान उनके साथ पीएसएम विभाग के अनुभवी चिकित्सक और शिक्षक भी बतौर गाइड मौजूद रहे। ग्रामीण परिवेश में जाकर इलाज करने से छात्रों को वास्तविक चुनौतियों का पता चलता है। वे सीखते हैं कि सीमित संसाधनों में कैसे बेहतर चिकित्सा प्रदान की जा सकती है। इससे न केवल ग्रामीणों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य परामर्श मिल रहा है, बल्कि छात्रों को भी अपनी पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक (Practical) अनुभव प्राप्त हो रहा है।

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