राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बीच सुप्रीमकोर्ट पहुंच गए उद्धव ठाकरे
22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है. लगभग 500 वर्षों के अथक प्रयास बाद राम लला मंदिर का निर्माण हुआ और अब उद्घाटन होने जा रहा है. इस समारोह को लेकर देश भर में जहां भारी उत्साह है वहीं दूसरी ओर इन सभी के बीच उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है. लगभग 500 वर्षों के अथक प्रयास बाद राम लला मंदिर का निर्माण हुआ और अब उद्घाटन होने जा रहा है. इस समारोह को लेकर देश भर में जहां भारी उत्साह है वहीं दूसरी ओर इन सभी के बीच उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
दरअसल, शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हलफनामा दाखिल किया है. उद्धव गुट ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और स्पीकर राहुल नार्वेकर की मुलाकात पर आपत्ति जताई है. हलफनामे में कहा गया है कि विधायकों की अयोग्यता पर फैसला देने से पहले स्पीकर का सीएम से मिलना गलत है.बता दें 7 जनवरी को स्पीकर और सीएम की मुलाकात हुई थी.बताते चलें कि नार्वेकर और शिंदे की मुलाकात का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा था कि 10 जनवरी को विधायकों की पात्रता और अपात्रता के फैसले पर इसका असर हो सकता है. हमने इसकी शिकायत की है. उद्धव ठाकरे ने आशंका जताई कि कल भी फैसला न आए. उन्होंने कहा, ”किसी बहाने से इसे चुनाव तक टाला जा सकता है.”
मालुम हो कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विधायकों की बगावत के चलते जून 2022 में शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी. जिसके बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास आघाड़ी सरकार गिर गई थी. इसके बाद शिंदे और ठाकरे गुटों की तरफ से दलबदल रोधी कानूनों के तहत एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की गईं जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए समय-सीमा 31 दिसंबर, 2023 तय की थी, लेकिन उससे कुछ दिनों पहले ही 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिए गए समय को 10 दिन बढ़ाकर 10 जनवरी की नई तारीख तय फैसला सुनाने की थी.



