कर्तव्य पथ पर शहादत की गूंज: 26 जनवरी की झांकी में गुरु तेग बहादुर साहिब जी और सिख बलिदान की अमर गाथा
26 जनवरी की झांकी में गुरु तेग बहादुर साहिब जी, भाई मतीदास, भाई सतीदास और भाई दयाला जी की शहादत के जरिए भारत को त्याग और मानवता का संदेश।
Guru Tegh Bahadur Sahib: भारत का इतिहास सिर्फ विजयों और युद्धों से नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और धर्म की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदानों से बना है। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर निकलने वाली पंजाब की झांकी इसी सच्चाई को देश और दुनिया के सामने रखने जा रही है। यह झांकी गुरु तेग बहादुर साहिब (Guru Tegh Bahadur Sahib) जी के बलिदान और उनके साथ शहीद हुए भाई मतीदास जी, भाई सतीदास जी और भाई दयाला जी की अमर शहादत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगी।
साइड पैनलों में उकेरी गई शहादत की अमर गाथा
इस झांकी के साइड पैनल सिख इतिहास के उन स्वर्णिम अध्यायों को दर्शाते हैं, जहाँ सच्चाई और धर्म की रक्षा के लिए जीवन को भी तुच्छ समझा गया। भाई मतीदास जी को आरे से चीर दिया गया, भाई सतीदास जी को रुई में लपेटकर जिंदा जलाया गया और भाई दयाला जी को खौलते पानी में उबाल दिया गया—लेकिन किसी ने भी अपने विश्वास से समझौता नहीं किया। ये दृश्य आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देंगे कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस है। यह झांकी सिखों के उस विचार को मजबूती से सामने लाती है, जहाँ इंसानियत सबसे ऊपर है।

350वें शहीदी दिवस का ऐतिहासिक आयोजन और मान सरकार की भूमिका
पंजाब सरकार ने हाल ही में गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को जिस ऐतिहासिक स्तर पर मनाया, उसने साफ कर दिया कि यह सरकार सिख धर्म को केवल याद नहीं करती, बल्कि उसके मूल्यों को अपने शासन में अपनाती भी है। श्री आनंदपुर साहिब में भव्य कार्यक्रम, देश-विदेश से निकले नगर कीर्तन, और भाई जैता जी स्मारक स्थल पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र – ये सभी पहल मुख्यमंत्री भगवंत मान की दूरदर्शी और संवेदनशील लीडरशिप को दर्शाती हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि संविधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
26 जनवरी की झांकी और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश
कर्तव्य पथ पर निकलने वाली यह झांकी केवल एक राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं करेगी, बल्कि पूरे भारत की आत्मा को दर्शाएगी। यह झांकी बताएगी कि भारत की असली ताकत मिसाइलों या हथियारों में नहीं, बल्कि त्याग, करुणा और मानव एकता में निहित है। जब बच्चे और युवा इस झांकी को देखेंगे, तो उन्हें यह समझ आएगा कि इस देश की आज़ादी और अखंडता के पीछे कितने अनगिनत बलिदान छिपे हैं। यह झांकी इतिहास को किताबों से निकालकर जनमानस के दिलों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।



