MEA ने ट्रंप सहयोगी के दावे को बताया गलत, कहा – 2025 में मोदी-ट्रंप के बीच हुईं 8 बार बातचीत
MEA ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के उस बयान को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया। भारत ने बताया कि 2025 में मोदी-ट्रंप के बीच 8 बार बातचीत हुई।
Modi Trump Calls 2025: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के हालिया बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। लटनिक ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कॉल न किए जाने के कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी हुई। MEA ने इस दावे को “तथ्यों से परे और गलत” बताया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि 2025 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कुल आठ बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन वार्ताओं में भारत-अमेरिका साझेदारी के कई अहम पहलुओं पर चर्चा हुई थी।
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अमेरिकी मंत्री के दावे पर MEA की प्रतिक्रिया
रणधीर जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय ने हॉवर्ड लटनिक की टिप्पणियों को देखा है, लेकिन जिस तरह से बातचीत को प्रस्तुत किया गया है, वह वास्तविकता से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने 13 फरवरी 2025 को ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्धता जताई थी और इसके बाद कई दौर की वार्ताएं हुईं।
MEA के अनुसार, कई मौकों पर समझौता अंतिम चरण तक पहुंच गया था, लेकिन इसे केवल किसी एक कॉल या व्यक्तिगत पहल से जोड़ना उचित नहीं है। जायसवाल ने कहा,
“इन चर्चाओं का जो चरित्रण किया गया है, वह सटीक नहीं है।”
व्यापार समझौते पर कहां अटका मामला?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताएं अहम भूमिका निभा रही हैं। भारत जहां अपने घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की रक्षा पर जोर दे रहा है, वहीं अमेरिका बाजार पहुंच और टैरिफ में कटौती की मांग कर रहा है।
MEA ने दोहराया कि भारत एक पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
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All-In Podcast में क्या बोले थे हॉवर्ड लटनिक?
हॉवर्ड लटनिक ने Chamath Palihapitiya द्वारा होस्ट किए गए लोकप्रिय All-In Podcast में कहा था कि व्यापार समझौते के लिए ट्रंप “क्लोजर” हैं और भारत की ओर से पहल की जरूरत थी। उन्होंने दावा किया,
“सब कुछ सेट था, लेकिन मोदी ने कॉल नहीं किया।”
MEA ने इस बयान को न केवल भ्रामक बताया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीतिक संवाद कई स्तरों पर होता है, सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं रहता।

रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का दबाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका में एक नया विधेयक भी चर्चा में है, जिसे हाल ही में मंजूरी मिली है। इस बिल के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बनाना बताया जा रहा है।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने का एक मजबूत हथियार होगा, ताकि वे सस्ते रूसी तेल की खरीद बंद करें।
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भारत का रुख स्पष्ट
भारत पहले भी साफ कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। MEA ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद भारत अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेता रहेगा।



