BMC चुनाव: क्यों बदली गई वोट गिनती की व्यवस्था? फेज़-वाइज़ काउंटिंग से उम्मीदवारों में बेचैनी
BMC चुनाव 2024 में वोटों की गिनती इस बार फेज़-वाइज़ होगी। जानिए क्यों बदली गई व्यवस्था, क्या हैं नेताओं की आपत्तियाँ और कैसे धीरे-धीरे आएंगे नतीजे।
BMC Election: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2024 इस बार सिर्फ राजनीतिक मुकाबले के कारण नहीं, बल्कि वोटों की गिनती की बदली हुई प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा में है। 2017 के चुनावों से हटकर इस बार 227 वार्डों में वोटों की गिनती एक साथ न होकर चरणों (Phase-wise) में की जाएगी, जिससे उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों में नाराज़गी और आशंकाएँ बढ़ गई हैं।
फेज़-वाइज़ वोट गिनती: क्या है नई व्यवस्था? (Phase-wise vote counting: What is the new system?)
इस बार BMC चुनाव में 23 रिटर्निंग ऑफिसर (RO) होंगे, जिनके पास लगभग 10-10 वार्ड की ज़िम्मेदारी होगी। लेकिन एक समय में केवल 2 वार्डों की गिनती की जाएगी। यानी पूरे मुंबई में अधिकतम 46 वार्डों के वोट ही एक साथ गिने जाएंगे। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है ताकि उपलब्ध मानव संसाधनों को सीमित वार्डों पर केंद्रित कर गिनती को तेज़ और सटीक बनाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इससे तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। हालांकि, इस फैसले से यह भी तय हो गया है कि सभी वार्डों के शुरुआती रुझान एक साथ सामने नहीं आएंगे, और कुछ इलाकों के नतीजे दिन के अंत तक ही घोषित हो पाएंगे।

नेताओं और उम्मीदवारों की आपत्तियाँ: “अब क्यों बदलाव?” (Objections from leaders and candidates: “Why change now?”)
इस नई व्यवस्था पर कई वरिष्ठ नेताओं और उम्मीदवारों ने सवाल उठाए हैं। शिवसेना (UBT) की उम्मीदवार और पूर्व नगरसेविका विशाखा राउत ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि उनका वार्ड RO-19 के अंतर्गत आता है, यानी वार्ड नंबर 191 की गिनती सबसे आखिर में होगी। उनका कहना है, “जब गिनती शुरू होती है तो लोगों में उत्साह रहता है। सभी एक साथ नतीजे जानना चाहते हैं। फिर अब व्यवस्था बदलने की क्या ज़रूरत थी?” वहीं, बीजेपी विधायक और मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने भी इसे एक प्रशासनिक फैसला बताते हुए कहा कि “अगर एक साथ गिनती होती तो पूरा काम एक ही बार में खत्म हो सकता था।” कांग्रेस विधायक असलम शेख ने तो इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इसमें हेरफेर की आशंका दिखाई देती है।
उनका कहना है, “सालों से एक ही पैटर्न चलता आ रहा था। अब अचानक बदलाव क्यों? कुछ वार्डों को अंत में रखने का क्या कारण है?”
EVM, PADU और काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया (The entire process of EVM, VVPAT, and counting)
मतदान पूरा होने के बाद 15 जनवरी को सभी EVM मशीनों को विक्रोली और कांदिवली स्थित दो स्ट्रॉन्गरूम में सुरक्षित रखा जाएगा।
गिनती के दिन (शुक्रवार) इन मशीनों को फिर से 23 काउंटिंग सेंटर्स में लाया जाएगा।
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार,
- कंट्रोल यूनिट को बैलट यूनिट से जोड़कर वोटों की गिनती की जाएगी।
- अगर किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो पहली बार Printing Auxiliary Display Unit (PADU) का इस्तेमाल किया जाएगा।
PADU मशीनें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा सप्लाई की गई हैं।
कुल 140 PADU यूनिट्स मंगाई गई हैं, जो सिर्फ इमरजेंसी बैकअप के तौर पर इस्तेमाल होंगी।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, PADU का इस्तेमाल केवल तभी होगा जब EVM से डेटा पढ़ने में कोई गंभीर तकनीकी दिक्कत आए।
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क्या फेज़-वाइज़ गिनती से नतीजों पर असर पड़ेगा? (Will counting the votes in phases affect the results?)
हालांकि प्रशासन इसे प्रबंधन और संसाधन बेहतर करने का तरीका बता रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों को डर है कि
- नतीजों में देरी होगी
- शुरुआती ट्रेंड नहीं मिल पाएंगे
- और आखिरी वार्डों तक माहौल बदल सकता है
यही वजह है कि “Why change now?” सवाल अब BMC चुनाव की सबसे बड़ी बहस बन चुका है।



