सोना खरीदने वालों के लिए RBI की चेतावनी! बड़े बैंकों ने जारी किया ‘स्लो डाउन’ अलर्ट, नहीं पढ़े खबर तो उड़ जाएंगे पैसे!

अमेरिका के फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) ने पिछले साल सितंबर में फिर से ब्याज दरें कम करनी शुरू की थीं। इससे सोने की कीमतों को बल मिला। अमेरिका में नौकरियों के आंकड़े कमजोर रहे और महंगाई भी काबू में रही, तो भी सोना चमकता रहा। अगर ब्याज दरें और कटती हैं, तो डॉलर कमजोर हो सकता है और सोना मजबूत।

Gold Buyers: दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (सेंट्रल बैंक) की सोने की भूख शायद अब 2026 में थोड़ी कम हो जाए।

Gold Buyers
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एक नई रिपोर्ट कहती है कि बैंक अभी भी सोना खरीदते रहेंगे, लेकिन पिछले कुछ सालों जितनी तेजी से नहीं। ऐसा क्यों? क्योंकि दुनिया में तनाव कम हो रहा है, अमेरिकी डॉलर की स्थिति बदल रही है और ब्याज दरों के नियम भी बदल रहे हैं।

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सोना क्यों है जरूरी?

पिछले कुछ सालों में जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी और अमेरिकी डॉलर पर भरोसा कम हुआ, तब केंद्रीय बैंकों ने सोने पर दांव लगाया। सोना एक सुरक्षित जगह माना जाता है। रिपोर्ट कहती है कि यह ट्रेंड तो चलता रहेगा, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं, इसलिए खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

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अमेरिका के फैसले का असर

अमेरिका के फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) ने पिछले साल सितंबर में फिर से ब्याज दरें कम करनी शुरू की थीं। इससे सोने की कीमतों को बल मिला। अमेरिका में नौकरियों के आंकड़े कमजोर रहे और महंगाई भी काबू में रही, तो भी सोना चमकता रहा। अगर ब्याज दरें और कटती हैं, तो डॉलर कमजोर हो सकता है और सोना मजबूत।

लेकिन एक डर भी है

रिपोर्ट एक चेतावनी भी देती है। हो सकता है कि 2026 के दूसरे हिस्से में अमेरिकी डॉलर फिर से ताकतवर हो जाए। खासकर तब, जब अमेरिका की अर्थव्यवस्था यूरोप से बेहतर रफ्तार से बढ़े। अगर डॉलर मजबूत हुआ, तो सोने की कीमतें और केंद्रीय बैंकों की मांग दोनों पर असर पड़ सकता है।

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क्या होगी सोने-चांदी की कीमत?

रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर टिका रहता है, तो यह 4,500-4,550 डॉलर तक जा सकता है। लेकिन अगर यह 4,200 डॉलर से नीचे गिरा, तो यह तेजी खत्म हो सकती है। वहीं, चांदी सोने से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, क्योंकि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक कार, डेटा सेंटर और डिफेंस जैसे उद्योगों में इसकी मांग बहुत ज्यादा है।

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ऐसे में मतलब साफ है। सोना अभी भी केंद्रीय बैंकों का पसंदीदा बना रहेगा, लेकिन वे इसे अब इतनी बेताबी से नहीं, बल्कि थोड़ी संभलकर खरीदेंगे। सोना चमकता रहेगा, लेकिन उसकी चमक पर थोड़ी धूल जम सकती है।

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