केरल में सियासी घमासान: BJP पार्षद आर. श्रीलेखा ने CPI(M) विधायक वी.के. प्रसांत से कार्यालय खाली करने की मांग की, MLA ने किया इनकार
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में BJP पार्षद और पूर्व DGP आर. श्रीलेखा द्वारा CPI(M) विधायक वी.के. प्रसांत से कार्यालय खाली करने की मांग पर सियासी विवाद गहराया। जानिए पूरा मामला, नेताओं की प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक मायने।
Kerala BJP-CPI(M) Office Dispute: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) में एक सरकारी इमारत को लेकर उठा विवाद अब बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है।

नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पार्षद और पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आर. श्रीलेखा द्वारा CPI(M) विधायक वी.के. प्रसांत (V.K. Prashant) से कार्यालय खाली करने की मांग ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। हालांकि बाद में श्रीलेखा ने इसे “मैत्रीपूर्ण अनुरोध” बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे सत्ताधारी दल की असहिष्णु राजनीति करार दिया।
क्या है सस्थामंगलम कार्यालय विवाद का पूरा मामला?
यह विवाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम की उस इमारत से जुड़ा है, जहां सस्थामंगलम वार्ड पार्षद का कार्यालय और वट्टियूरकावू विधानसभा क्षेत्र के विधायक वी.के. प्रसांत का कार्यालय स्थित है। यह भवन नगर निगम के स्वास्थ्य सर्कल कार्यालय के रूप में भी इस्तेमाल होता है।

विधायक प्रसांत के अनुसार, इस इमारत का नवीनीकरण 2015 से 2019 के बीच उनके मेयर कार्यकाल में हुआ था। उस समय हॉल को विभाजित कर विधायक और पार्षद दोनों के लिए अलग-अलग कार्यालय बनाए गए थे। इससे पहले भी यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्षद बिना किसी आपत्ति के कार्य करते रहे।
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विधायक वी.के. प्रसांत (V.K. Prashant) का कड़ा रुख
आर. श्रीलेखा (R. Sreelekha) द्वारा फोन पर कार्यालय खाली करने के अनुरोध के बाद विधायक प्रसांत ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने 31 मार्च 2026 तक का किराया नगर निगम को अदा कर दिया है और अपने कार्यकाल की समाप्ति (मई) तक कार्यालय बनाए रखने के लिए आवेदन भी कर रखा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले सात वर्षों से यह व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी, तो अब अचानक इसे समस्या क्यों बताया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यालय को जबरन खाली कराने की कोशिश की गई, तो वह इसका राजनीतिक और कानूनी तरीके से विरोध करेंगे।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बढ़ता टकराव
विवाद बढ़ने के बाद आर. श्रीलेखा स्वयं विधायक प्रसांत के कार्यालय पहुंचीं और कहा कि उनका कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक विरोध नहीं है। उन्होंने विधायक को “भाई समान” बताया और कहा कि पार्षद के लिए उपलब्ध जगह सीमित है, जबकि विधायक अपने क्षेत्र में कहीं भी कार्यालय खोल सकते हैं।
हालांकि CPI(M) नेताओं ने इस बयान को स्वीकार नहीं किया। स्थानीय स्वशासन मंत्री एम.बी. राजेश ने इसे BJP की “अलोकतांत्रिक और असहिष्णु मानसिकता” बताया। शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कहा कि किसी पार्षद को विधायक से इस तरह की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है।
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नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश ने विवाद को अनावश्यक रूप से राजनीतिक न बनाने की अपील की और संकेत दिया कि परिषद कार्यालय किराए की दरों पर पुनर्विचार कर सकती है।
राजनीतिक मायने
यह विवाद केवल एक कार्यालय की जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केरल की स्थानीय राजनीति में बढ़ते दलगत तनाव को दर्शाता है। BJP के बढ़ते प्रभाव और CPI(M) के मजबूत जनाधार के बीच ऐसे मुद्दे आने वाले वर्षों में और तीखे हो सकते हैं।
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निष्कर्ष (Conclusion)
सस्थामंगलम कार्यालय विवाद ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय प्रशासनिक फैसले भी जब राजनीतिक रंग ले लेते हैं तो बड़ा विवाद बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम परिषद इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है और क्या यह विवाद कानूनी मोड़ लेता है।
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