तारीक़ रहमान की स्वदेश वापसी: निर्वासन से सत्ता के केंद्र तक ‘प्रिंस’ की राजनीतिक वापसी
तारीक़ रहमान की 18 साल बाद बांग्लादेश वापसी, BNP की नई रणनीति, समावेशी राजनीति और ज़िया विरासत के सहारे आगामी चुनावों की पूरी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट।
Tariq Rahman Returns To Bangladesh: 25 दिसंबर को जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारीक़ रहमान लंदन में स्वैच्छिक निर्वासन के बाद ढाका के हज़रत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, तो यह केवल एक व्यक्ति की वापसी नहीं थी, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत थी। वर्षों की अनुपस्थिति, आरोपों और राजनीतिक संघर्षों के बाद, उनकी यह वापसी ऐसे समय पर हुई है जब देश शेख़ हसीना के लंबे शासन के बाद अपने पहले आम चुनाव की तैयारी कर रहा है।

हवाई अड्डे के वीवीआईपी लाउंज से बाहर निकलकर, तारीक़ रहमान (Tariq Rahman) का जूते उतारकर ज़मीन पर नंगे पांव चलना एक प्रतीकात्मक कदम था। यह इशारा केवल अपनी मातृभूमि से दोबारा जुड़ने का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक यात्रा को दोबारा शुरू करने का था, जो 2006 के राजनीतिक संकट के कारण अधूरी रह गई थी।
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समावेशन और सौहार्द का संदेश
लंदन से लौटने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में, तारीक़ रहमान (Tariq Rahman) ने सांप्रदायिक और अंतर-जातीय एकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बांग्लादेश की स्थिरता और प्रगति तभी संभव है जब सभी समुदायों को साथ लेकर चला जाए। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश हाल के महीनों में विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक हिंसा और भीड़ की गतिविधियों से जूझता रहा है।

तारीक़ रहमान (Tariq Rahman) का यह रुख़ BNP की उस छवि को बदलने का प्रयास माना जा रहा है, जिसे लंबे समय से कट्टरपंथी और विभाजनकारी राजनीति से जोड़ा जाता रहा है। उन्होंने अपने भाषण में विपक्ष द्वारा लगाए गए कई आरोपों को खारिज करते हुए खुद को एक समावेशी और लोकतांत्रिक नेता के रूप में प्रस्तुत किया।
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हसीना बनाम ज़िया की विरासत
2009 से 2024 तक सत्ता में रहीं प्रधानमंत्री शेख़ हसीना (Sheikh Hasina) ने बार-बार BNP और ख़ालिदा ज़िया को “पाकिस्तान समर्थक” करार दिया था। तारीक़ रहमान ने इस आरोप का जवाब इतिहास के सहारे दिया। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम में BNP की भूमिका और विशेष रूप से 7 नवंबर 1971 की राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख किया, जब उनके पिता जनरल ज़ियाउर रहमान सत्ता के केंद्र में उभरे।
उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दिया कि जिस तरह शेख़ हसीना अपने पिता शेख़ मुजीबुर रहमान की विरासत के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति गढ़ती हैं, उसी तरह वे भी अपने पिता की ऐतिहासिक भूमिका को अपनी राजनीतिक पहचान का आधार बनाएंगे।
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ज़ियाउर रहमान की ऐतिहासिक भूमिका
जनरल ज़ियाउर रहमान (Ziaur Rahman) का जीवन बांग्लादेश के इतिहास से गहराई से जुड़ा रहा है। वे पहले पाकिस्तान सेना का हिस्सा थे और 1965 के भारत-पाक युद्ध में भी शामिल रहे। लेकिन 1971 में, ऑपरेशन सर्चलाइट के बाद उन्होंने पाकिस्तानी सेना से विद्रोह कर पूर्वी पाकिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा की। यह घोषणा बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।
तारीक़ रहमान द्वारा इस विरासत को दोहराना यह दर्शाता है कि आने वाले चुनावों में बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास बनाम वर्तमान सत्ता की बहस में उलझ सकती है।

आगे की राजनीति और चुनावी संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि तारीक़ रहमान की वापसी BNP के लिए नई ऊर्जा लेकर आई है। उनका समावेशी संदेश, इतिहास का सहारा और सत्ता-विरोधी माहौल—ये सभी तत्व आगामी चुनावों में निर्णायक साबित हो सकते हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि उन्हें अभी जनता का विश्वास पूरी तरह जीतने और पुराने विवादों से बाहर निकलने की चुनौती का सामना करना होगा।
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