Perplexity CEO Aravind Srinivas की चेतावनी: क्या अरबों डॉलर के डेटा सेंटर्स जल्द हो जाएंगे बेकार?
Perplexity के CEO Aravind Srinivas का बड़ा दावा-AI का भविष्य क्लाउड डेटा सेंटर्स में नहीं, बल्कि ऑन-डिवाइस AI में छिपा है।
On-Device AI vs Data Centers: दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां जैसे Google, Meta, Microsoft और OpenAI आज अरबों डॉलर डेटा सेंटर्स पर खर्च कर रही हैं। लेकिन इसी बीच Perplexity AI के CEO Aravind Srinivas ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उनका कहना है कि AI का भविष्य क्लाउड डेटा सेंटर्स में नहीं, बल्कि यूजर्स के डिवाइस में छिपा है।

YouTube पर Prakhar Gupta के साथ एक पॉडकास्ट में बात करते हुए Srinivas ने कहा कि यदि AI मॉडल सीधे मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिवाइस पर चलने लगें, तो बड़े और महंगे डेटा सेंटर्स की जरूरत ही खत्म हो सकती है।
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डेटा सेंटर्स के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
Aravind Srinivas के अनुसार,“डेटा सेंटर्स के लिए सबसे बड़ा खतरा तब होगा जब पूरी इंटेलिजेंस को एक छोटे से चिप में पैक कर दिया जाए, जो सीधे डिवाइस पर काम करे।”
आज AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT, Gemini और Perplexity भारी भरकम सर्वर्स पर निर्भर हैं। ये सर्वर न केवल बेहद ज्यादा बिजली खपत करते हैं बल्कि उन्हें ठंडा रखने के लिए पानी और लगातार मेंटेनेंस की भी जरूरत होती है। Srinivas का मानना है कि अगर AI प्रोसेसिंग लोकल डिवाइस पर शिफ्ट हो जाए, तो यह पूरा सिस्टम ही अप्रासंगिक हो सकता है।

On-Device AI क्यों है भविष्य की टेक्नोलॉजी?
On-Device AI का सबसे बड़ा फायदा यह है कि AI मॉडल यूजर के साथ “जीता” है। इसका मतलब है कि AI सीधे आपके फोन या कंप्यूटर पर मौजूद डेटा से सीख सकता है।
Srinivas के अनुसार:
- AI यूजर की पर्सनल प्रेफरेंसेस को बेहतर समझेगा।
- डेटा बाहर सर्वर पर नहीं जाएगा, जिससे प्राइवेसी बढ़ेगी।
- इंटरनेट न होने पर भी AI काम कर सकेगा।
- बिजली और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता घटेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि AI को खुद को यूजर के अनुसार ढालने के लिए हमेशा इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। डिवाइस में मौजूद लोकल डेटा को AI रीयल-टाइम में एक्सेस कर सकता है।
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क्या अरबों डॉलर का निवेश डूब सकता है?
आज जिस रफ्तार से डेटा सेंटर्स बन रहे हैं, उसमें अरबों डॉलर का निवेश लगा हुआ है। लेकिन अगर Aravind Srinivas की भविष्यवाणी सच होती है, तो यह पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ओवर-इन्वेस्टमेंट साबित हो सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि:
- शॉर्ट टर्म में डेटा सेंटर्स जरूरी रहेंगे।
- बड़े AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए अभी भी क्लाउड चाहिए।
- लेकिन Inference (AI का इस्तेमाल) धीरे-धीरे डिवाइस पर शिफ्ट हो सकता है।
यानी आने वाले समय में एक Hybrid AI Model देखने को मिल सकता है, जहां ट्रेनिंग क्लाउड में और इस्तेमाल डिवाइस पर होगा।
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AI इंडस्ट्री के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर On-Device AI सफल होता है, तो:
- स्मार्टफोन कंपनियां खुद की AI चिप्स विकसित करेंगी।
- यूजर्स को तेज, सस्ता और ज्यादा सुरक्षित AI मिलेगा।
- टेक कंपनियों का बिजनेस मॉडल बदल सकता है।
- डेटा सेंटर्स की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।
यह बदलाव वैसा ही हो सकता है, जैसा PC से मोबाइल की ओर शिफ्ट में हुआ था।



