अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला चीन को देगा कूटनीतिक बढ़त, लेकिन ताइवान पर हमला फिलहाल नहीं: विश्लेषक

अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले से चीन को कूटनीतिक बढ़त मिली है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार ताइवान पर हमला फिलहाल संभव नहीं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

America Venezuela Attack China Taiwan: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।’

America Venezuela Attack China Taiwan
America Venezuela Attack China Taiwan

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस कदम से चीन को अमेरिका की “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” पर सवाल उठाने का एक बड़ा अवसर मिला है। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि इससे चीन द्वारा ताइवान पर तत्काल सैन्य हमला किए जाने की संभावना नहीं बढ़ती।

विश्लेषकों के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ताइवान को लेकर रणनीति और समयसीमा अमेरिका की लैटिन अमेरिका में की गई कार्रवाई से सीधे प्रभावित नहीं होती। ताइवान से जुड़े फैसले मुख्य रूप से चीन की घरेलू राजनीति, सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

इसे भी पढें: चैवरोन शेयरों में 8% उछाल – ट्रंप की वेनेज़ुएला पर सैन्य हस्तक्षेप से अमेरिकी तेल कंपनियों को बड़ा फायदा

अमेरिका की कार्रवाई और चीन की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हुई इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क भेजा गया, जहां उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है। इस कदम की चीन ने कड़ी आलोचना की है। चीन के सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने इसे “खुला हुआ वर्चस्ववादी व्यवहार” बताया और कहा कि अमेरिका का तथाकथित “रूल्स-बेस्ड इंटरनेशनल ऑर्डर” दरअसल अपने हितों पर आधारित है।

बीजिंग का कहना है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है और लैटिन अमेरिका की शांति को खतरे में डाला है। चीन ने मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग भी की है। गौरतलब है कि मादुरो की गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने कराकस में एक उच्चस्तरीय चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी।

चीन को मिला “कूटनीतिक हथियार”

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विश्लेषक विलियम यांग के अनुसार, अमेरिका लंबे समय से चीन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है, लेकिन वेनेजुएला में की गई इस कार्रवाई से उसकी नैतिक स्थिति कमजोर हुई है। इससे चीन को भविष्य में अमेरिका के खिलाफ “सस्ता लेकिन असरदार कूटनीतिक हथियार” मिल गया है।

America Venezuela Attack China Taiwan
America Venezuela Attack China Taiwan

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन इस घटना का इस्तेमाल ताइवान, तिब्बत और दक्षिण चीन सागर जैसे विवादित मुद्दों पर अमेरिकी आलोचना का जवाब देने के लिए करेगा।

ताइवान पर हमला क्यों नहीं?

हालांकि ताइवान पर चीन के बढ़ते दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाल ही में चीन ने ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए, जिससे यह संदेश गया कि वह जरूरत पड़ने पर द्वीप को बाहरी मदद से काट सकता है।

इसे भी पढें: ज्ञानेश कुमार को शुभेंदु अधिकारी का पलटवार: ममता बनर्जी के सभी आरोपों का खंडन, SIR प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

लेकिन बीजिंग स्थित रेनमिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शी यिनहोंग का कहना है कि ताइवान पर कब्जा करना चीन की सैन्य क्षमता से जुड़ा सवाल है, न कि अमेरिका द्वारा किसी अन्य देश में की गई कार्रवाई से।

एशिया सोसाइटी के फेलो नील थॉमस के अनुसार, चीन ताइवान को आंतरिक मामला मानता है, इसलिए वह वेनेजुएला को उदाहरण बनाकर कोई सैन्य कदम नहीं उठाएगा। बल्कि बीजिंग खुद को अमेरिका के मुकाबले “शांति और नैतिक नेतृत्व” का पक्षधर दिखाने की कोशिश करेगा।

America Venezuela Attack China Taiwan
America Venezuela Attack China Taiwan

ताइवान की प्रतिक्रिया

ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ सांसद वांग टिंग-यू ने भी चीन के हमले की आशंका को खारिज किया। उन्होंने कहा, “चीन के पास ताइवान पर कब्जा करने के साधन नहीं हैं। अगर ऐसा होता, तो वह बहुत पहले कर चुका होता। चीन अमेरिका नहीं है और ताइवान वेनेजुएला नहीं।”

फिर भी कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात ताइवान के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं और ताइपे को अमेरिका के और करीब जाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

इसे भी पढें: ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की धमकी: डेनमार्क के प्रधानमंत्री का ट्रंप को कड़ा जवाब -“अमेरिका को कोई अधिकार नहीं”

सोशल मीडिया और जनमत

चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर अमेरिका की कार्रवाई को लेकर जबरदस्त चर्चा हुई। कई यूज़र्स ने कहा कि बीजिंग को ट्रंप की रणनीति से “सीख” लेनी चाहिए। वहीं, ताइवान सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि माना जा रहा है कि वह अमेरिका के प्रति हल्का समर्थन जता सकती है।

Related Articles

Back to top button