ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की धमकी: डेनमार्क के प्रधानमंत्री का ट्रंप को कड़ा जवाब -“अमेरिका को कोई अधिकार नहीं”
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की धमकी के बाद डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने सख्त प्रतिक्रिया दी। जानिए ग्रीनलैंड विवाद, अमेरिका-डेनमार्क तनाव और आर्कटिक राजनीति का पूरा विश्लेषण।
Greenland Takeover By US: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए ग्रीनलैंड की “बिल्कुल ज़रूरत” है। फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड या डेनमार्क साम्राज्य के किसी भी हिस्से पर कब्ज़ा करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने रविवार को बयान जारी करते हुए कहा, “यह कहना कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करना चाहिए, पूरी तरह से निरर्थक है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश को दूसरे संप्रभु क्षेत्र को हड़पने का अधिकार नहीं है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिकी विस्तारवाद को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप समर्थक MAGA आंदोलन से जुड़े कई प्रभावशाली लोग खुले तौर पर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बातें कर रहे हैं।
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MAGA समर्थकों की भड़काऊ पोस्ट से बढ़ा विवाद
ट्रंप के करीबी सलाहकार स्टीफन मिलर की पत्नी और दक्षिणपंथी पॉडकास्टर कैटी मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग्रीनलैंड का एक नक्शा पोस्ट किया, जिस पर अमेरिकी झंडा लिपटा हुआ था और कैप्शन में लिखा था – “SOON।”
इस पोस्ट को डेनमार्क और ग्रीनलैंड में सीधी धमकी के रूप में देखा गया।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने इस पोस्ट को “असम्मानजनक” बताया। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित होते हैं, न कि सोशल मीडिया के उकसावे पर। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को घबराने की जरूरत नहीं है और देश “बिकाऊ नहीं” है।
ट्रंप का दोहराया दावा: “हमें ग्रीनलैंड चाहिए”
डेनमार्क की प्रतिक्रिया के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और डेनमार्क वहां की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता।
इससे पहले ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि वे ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य विकल्प से इनकार नहीं करते।

ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा पिटुफिक स्पेस बेस स्थित है। आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने इस द्वीप की अहमियत और बढ़ा दी है।
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डेनमार्क की सख्त कूटनीतिक चेतावनी
अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसेन ने भी साफ शब्दों में कहा कि दोनों देश सहयोगी हैं, लेकिन डेनमार्क अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि डेनमार्क ने 2025 में आर्कटिक और नॉर्थ अटलांटिक सुरक्षा के लिए 13.7 अरब डॉलर के रक्षा खर्च की घोषणा की है।
हाल ही में डेनमार्क की रक्षा खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को एक संभावित सुरक्षा जोखिम के रूप में चिन्हित किया, जो ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत है।
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ग्रीनलैंड की जनता क्या चाहती है?
जनवरी में हुए एक सर्वे के अनुसार, ग्रीनलैंड की अधिकांश आबादी भविष्य में डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहती है, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं है। ग्रीनलैंड को 2009 से स्वतंत्रता की घोषणा करने का अधिकार प्राप्त है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की बयानबाज़ी को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता। रक्षा विशेषज्ञ जेनिफर कावानाघ के अनुसार, अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड में सीमित सैन्य मौजूदगी स्थापित करना मुश्किल नहीं होगा, और यही बात यूरोप को चिंतित कर रही है।



