खामेनेई का ‘डेथ ट्रैप’? बुर्ज खलीफा से रियाद तक मिसाइलों का कहर, जानें कैसे 12 देश बन गए महाजंग का हिस्सा
क्या मध्य पूर्व में '12 राष्ट्रों का युद्ध' शुरू हो चुका है? जानिए कैसे खामेनेई शासन की रणनीतियों ने दुबई, रियाद और दोहा जैसे समृद्ध शहरों को जंग के मैदान में झुलसा दिया है। एक विस्तृत विश्लेषण।
War of 12 Nations Middle East: मिडिल ईस्ट डेस्क: दशकों से जो आशंका जताई जा रही थी, वह अब एक भयानक हकीकत में बदलती दिख रही है। जिस संघर्ष को केवल ईरान बनाम इजराइल और अमेरिका समझा जा रहा था, उसने अब एक ‘वैश्विक युद्ध’ का रूप ले लिया है। इसे ’12 राष्ट्रों का युद्ध’ (War of 12 Nations) कहा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस आग में वे खाड़ी देश (Gulf Countries) भी झुलस रहे हैं, जो अपनी लग्जरी और शांति के लिए जाने जाते थे। आज दुबई, अबू धाबी, रियाद और दोहा जैसे शहरों के आसमान में चमकती लाइटें आतिशबाजी की नहीं, बल्कि गिरती हुई ईरानी मिसाइलों की हैं।
खामेनेई की ‘शैडो वॉर’ रणनीति: कैसे फंसाया मुस्लिम देशों को?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद भी उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने बड़ी चालाकी से अपनी सुरक्षा को पूरे इस्लामिक जगत की सुरक्षा से जोड़ दिया। जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर ‘रिजीम चेंज’ के इरादे से हमला किया, तो ईरान ने इसका जवाब केवल इजराइल को नहीं, बल्कि उन सभी खाड़ी देशों को दिया जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ईरान ने ‘War of 12 Nations’ के जाल में इन देशों को प्रत्यक्ष रूप से घसीट लिया है:
- अमेरिका, 2. इजरायल, 3. ईरान, 4. बहरीन, 5. सऊदी अरब, 6. इराक, 7. संयुक्त अरब अमीरात, 8. कतर, 9. कुवैत, 10. जॉर्डन, 11. यमन, 12. लेबनान।

दुबई और रियाद पर हमले: ढहता ‘खाड़ी समृद्धि’ का सपना
शनिवार की उस काली रात ने दुनिया को तब स्तब्ध कर दिया जब ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने दुबई की शान ‘बुर्ज खलीफा’ को निशाना बनाने की कोशिश की। यह हमला केवल सैन्य नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक था। ईरान ने यह संदेश दिया है कि यदि उसकी सत्ता खतरे में पड़ी, तो वह पूरे मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था को मलबे में तब्दील कर देगा। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आना इस बात का सबूत है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर है। ट्रंप ने सऊदी की सुरक्षा का भरोसा तो दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि ‘पैट्रियट’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी ईरान के मिसाइल झुंड (Swarm Attacks) के सामने संघर्ष कर रहे हैं। खास जानकारी: ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी चोकपॉइंट ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को बंद कर दिया है। यहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
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प्रॉक्सिस का खेल: ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ और टूटते गठबंधन
इस युद्ध की सबसे जटिल कड़ी ईरान के ‘प्रॉक्सी’ संगठन हैं। यमन के हूती विद्रोही और लेबनान का हिजबुल्लाह अब स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि एक संगठित इकाई के रूप में काम कर रहे हैं।
- हूती विद्रोही: लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर वैश्विक सप्लाई चेन को ठप कर रहे हैं।
- हिजबुल्लाह: इजराइल की उत्तरी सीमा पर दबाव बनाकर उसे दो मोर्चों पर लड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।
जॉर्डन और कुवैत जैसे देश, जो अब तक तटस्थ रहने की कोशिश कर रहे थे, अब अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण इस War of 12 Nations Middle East का हिस्सा बन चुके हैं। ओमान के पास एक तेल टैंकर पर हुए हमले ने यह साफ कर दिया है कि अब कोई भी समुद्री रास्ता सुरक्षित नहीं है।



