ईरान के परमाणु ठिकानों पर US और इजरायल का हमला? IAEA की ‘रेडियोधर्मी रिसाव’ की चेतावनी ने बढ़ाई दुनिया की धड़कनें

ईरान का दावा: अमेरिका और इजरायल ने परमाणु ठिकानों पर किया हमला! जानें IAEA चीफ राफेल ग्रॉसी ने रेडियोधर्मी रिसाव और जमीनी हकीकत पर क्या कहा। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Iran Nuclear Sites Attack Claims: पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ अब परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। ईरान (Iran) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका (America) और इजरायल (Isreal) ने उसके सुरक्षित परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है। इस खबर के बाद से वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जहाँ एक तरफ ईरान (Iran) हमले की बात कह रहा है, वहीं परमाणु निगरानी संस्था IAEA के बयानों ने रहस्य और चिंता दोनों बढ़ा दी हैं।

नतान्ज फैसिलिटी पर हमले का दावा (Claims of attack on Natanz facility): ईरान और IAEA के बयानों में विरोधाभास (Contradictions between Iran and IAEA statements)

ईरान (Iran) के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सामने आधिकारिक तौर पर यह आरोप लगाया कि रविवार को अमेरिका (America) और इजरायल (Isreal) ने संयुक्त रूप से ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी (Natanz Nuclear Facility) पर हमला किया है। हालांकि, IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी (Rafael Grossi) ने सोमवार को 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में इस दावे पर स्थिति स्पष्ट की। ग्रॉसी ने कहा कि फिलहाल एजेंसी के पास ऐसे कोई ठोस सबूत या संकेत नहीं हैं जो यह पुष्टि करें कि किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान को भौतिक रूप से नुकसान पहुँचा है। लेकिन, राजदूत के सीधे आरोपों ने इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरमा दिया है।

Iran Nuclear Sites Attack Claims
Iran Nuclear Sites Attack Claims

‘रेडियोधर्मिता रिसाव’ (Radioactive Leak) का खतरा: शहरों को खाली करने की नौबत?

भले ही IAEA ने तत्काल हमले की पुष्टि नहीं की है, लेकिन राफेल ग्रॉसी की एक चेतावनी ने सबको चौंका दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सैन्य संघर्ष को देखते हुए ‘रेडियोधर्मिता रिसाव’ की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। ग्रॉसी ने आगाह किया कि:

  • यदि किसी भी कारण से परमाणु संयंत्रों से रेडिएशन फैलता है, तो आसपास के बड़े शहरों को इमरजेंसी में खाली (Evacuation) कराना पड़ सकता है।
  • IAEA का ‘इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर’ (IEC) 24 घंटे सक्रिय है और स्थिति का आकलन कर रहा है।
  • संचार बाधाओं के बावजूद क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क को अलर्ट पर रखा गया है।

राहत की बात यह है कि अब तक ईरान के पड़ोसी देशों में विकिरण (Radiation) का स्तर सामान्य पाया गया है, लेकिन जोखिम अभी भी बरकरार है।

कूटनीति बनाम युद्ध (Diplomacy vs. War): परमाणु सुरक्षा पर बढ़ता वैश्विक संकट (The Growing Global Crisis on Nuclear Security)

ईरान (Iran) के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र और तेहरान अनुसंधान रिएक्टर फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन IAEA चीफ ने याद दिलाया कि इस क्षेत्र में केवल ईरान ही नहीं, बल्कि यूएई, जॉर्डन और सीरिया में भी परमाणु रिएक्टर मौजूद हैं। किसी भी एक चूक का नतीजा पूरे मध्य पूर्व के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। ग्रॉसी ने संयुक्त राष्ट्र महासम्मेलन के पुराने प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा कि परमाणु ठिकानों पर सशस्त्र हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “कूटनीति कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। हमें हर हाल में वार्ता की मेज पर लौटना होगा क्योंकि बल प्रयोग हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए।”

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