ईरान पर ‘कयामत’ बनकर टूटे अमेरिका और इजरायल: दिनदहाड़े शुरू हुआ 4 दिवसीय ‘ऑल आउट’ ऑपरेशन, क्या मलबे में तब्दील हो जाएंगे परमाणु ठिकाने?

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा 'दिनदहाड़े' संयुक्त मिसाइल हमला शुरू किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में 4 दिनों के इस 'ऑल आउट' ऑपरेशन की पूरी इनसाइड स्टोरी और परमाणु ठिकानों पर हुए हमले की विस्तृत जानकारी यहाँ पढ़ें।

US-Israeli Attack On Iran: दुनिया के नक्शे पर इस वक्त सबसे बड़ी सैन्य हलचल देखने को मिल रही है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल का हमला महज एक एयरस्ट्राइक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘ऑल आउट’ युद्ध की शुरुआत मानी जा रही है। आमतौर पर युद्ध रात के अंधेरे में लड़े जाते हैं, लेकिन इस बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री की जोड़ी ने रणनीति बदल दी है। हवा और समुद्र से बरस रही मिसाइलों ने तेहरान से लेकर ईरान के सुदूर सैन्य अड्डों तक को दहला दिया है।

‘डे-लाइट स्ट्राइक’: रात के अंधेरे में नहीं, दिन के उजाले में क्यों दहला ईरान?

इस ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी टाइमिंग है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल का हमला दिन के उजाले में करना एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक रणनीति है।

  • सरप्राइज एलिमेंट (Surprise element): ईरान को उम्मीद थी कि अगर हमला होगा तो वह रात में होगा। सुबह के वक्त हुए इन अचूक हमलों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को संभलने का मौका ही नहीं दिया।
  • महीनों की खुफिया प्लानिंग (Months of secret planning): इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है। इसके पीछे अमेरिका और इजरायल की महीनों की ज्वाइंट प्लानिंग है।
  • सीधा संदेश (Direct Message): दिनदहाड़े हमला करके ट्रंप प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि वे ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बनाने का माद्दा रखते हैं और उन्हें किसी भी जवाबी कार्रवाई का डर नहीं है।
US-Israeli Attack On Iran
US-Israeli Attack On Iran

4 दिनों का ‘किलिंग ज़ोन’ प्लान: ट्रंप ने क्यों दिया ‘ऑल आउट’ सैन्य ऑपरेशन का आदेश?

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालते ही ईरान के प्रति अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। इस 4 दिवसीय सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की कमर तोड़ना है। ऑपरेशन के मुख्य बिंदु:

  • परमाणु ठिकानों पर प्रहार (Strikes on nuclear targets): ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था। अमेरिका का लक्ष्य ईरान की यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) क्षमता को शून्य पर लाना है।
  • ठप होगी सैन्य शक्ति (Military power will be stalled): इजरायली अधिकारियों के अनुसार, पहले 24 घंटों में ईरान के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स और मिसाइल लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया गया है।
  • आपातकाल और सायरन (Emergency and Siren): हमले के साथ ही इजरायल ने अपने देश में ‘तत्काल आपात स्थिति’ घोषित कर दी है, क्योंकि उन्हें ईरान की ओर से बड़े पलटवार की आशंका है।

राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा संदेश: “ईरान अमेरिका तक पहुँचने वाली मिसाइलें बना रहा है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कभी-कभी शांति स्थापित करने के लिए बल का प्रयोग अनिवार्य हो जाता है।”

इसे भी पढें: विश्व युद्ध की आहट! इजरायल का ईरान पर भीषण हमला, तेहरान में मची तबाही; पूरे देश में ‘वार इमरजेंसी’ लागू

कूटनीति फेल, अब मिसाइलों से होगा फैसला: क्या यह महायुद्ध की आहट है?

ईरान के साथ लंबे समय से चल रही कूटनीतिक वार्ताएं अब इतिहास बन चुकी हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि बातचीत से ईरान के परमाणु मंसूबों को नहीं रोका जा सका, इसलिए अब ‘हार्ड पावर’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमले के निशाने पर क्या-क्या है?

  • नतांज और फोर्डो: ईरान के वे परमाणु केंद्र जहाँ यूरेनियम संवर्धित किया जाता है।
  • रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालय: ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई के ठिकाने।
  • पोर्ट फैसिलिटीज: समुद्र से दागी जा रही मिसाइलों ने ईरान के रणनीतिक बंदरगाहों को भी निशाना बनाया है ताकि उसकी सप्लाई चेन काटी जा सके।

इस हमले ने पूरी दुनिया को दो धड़ों में बांट दिया है। जहाँ एक तरफ इजरायल और अमेरिका अपनी सुरक्षा का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी देशों में तेल की कीमतों और वैश्विक अस्थिरता को लेकर डर का माहौल है।

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