ट्रंप के ग्रीनलैंड कब्ज़े के बयान पर रूस की चुप्पी: क्या NATO को तोड़ना है असली मकसद?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को जबरन लेने की धमकी पर चीन ने कड़ा जवाब दिया, लेकिन रूस खामोश रहा। जानिए इसके पीछे की रणनीति, NATO की भूमिका और पुतिन को होने वाले फायदे।

Trump Greenland Takeover: जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करना चाहिए, तो वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई।

Trump Greenland Takeover
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ट्रंप ने आरोप लगाया कि आर्कटिक क्षेत्र में चीनी और रूसी जहाज़ों की मौजूदगी बढ़ रही है। चीन ने इस बयान पर तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी, लेकिन रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। सवाल उठता है – रूस इतना शांत क्यों है?

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ग्रीनलैंड और आर्कटिक: रूस के लिए क्यों है अहम इलाका?

आर्कटिक क्षेत्र रूस के लिए रणनीतिक, आर्थिक और सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। रूस आर्कटिक महासागर के 53% तटरेखा को नियंत्रित करता है। यहां तेल, गैस, खनिज संसाधनों के विशाल भंडार हैं, जो रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

इसके अलावा, नॉर्दर्न सी रूट रूस के लिए यूरोप और एशिया के बीच एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। रूस ने इस क्षेत्र में परमाणु पनडुब्बियों, सैन्य अड्डों और दुनिया के सबसे बड़े आइसब्रेकर बेड़े को तैनात कर रखा है। ऐसे में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी पकड़ रूस के हितों को प्रभावित कर सकती है – फिर भी रूस खामोश है।

NATO में दरार: पुतिन के लिए सुनहरा मौका

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस की चुप्पी दरअसल एक सोची-समझी रणनीति है। NATO के पूर्व अधिकारी और सुरक्षा विश्लेषक जैमी शिया का कहना है कि रूस के लिए ग्रीनलैंड से ज्यादा महत्वपूर्ण है NATO का कमजोर होना।

अगर अमेरिका और डेनमार्क के बीच टकराव बढ़ता है और NATO के भीतर अविश्वास पैदा होता है, तो यह रूस के लिए बड़ी जीत होगी। स्वीडन और फिनलैंड के NATO में शामिल होने से रूस पहले ही असहज है, ऐसे में NATO का आंतरिक संकट पुतिन के लिए राहत बन सकता है।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अमेरिका यूरोप से ध्यान हटाकर पश्चिमी गोलार्ध में उलझता है, तो रूस को अफ्रीका, मध्य एशिया और मध्य-पूर्व में प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

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ग्रीनलैंड विवाद: NATO के लिए “राजनीतिक आत्मघात”?

ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों ने साफ कह दिया है कि यह द्वीप न तो बिकाऊ है और न ही कब्ज़े के लिए खुला है। यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप के बयान को खतरनाक बताते हुए कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से NATO का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।

RUSI के वरिष्ठ शोधकर्ता एडवर्ड आर. अर्नोल्ड के अनुसार, “NATO को सैन्य रूप से हराना रूस के लिए असंभव है, इसलिए वह राजनीतिक रूप से उसे कमजोर करना चाहता है।” ट्रंप के बयान NATO की Article 5 (सामूहिक सुरक्षा) की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं – जो पुतिन के लिए किसी तोहफे से कम नहीं।

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रूस की चुप्पी के अन्य कारण

  • रूस में ऑर्थोडॉक्स क्रिसमस के कारण छुट्टियों का दौर
  • वेनेजुएला और तेल टैंकर जब्ती जैसे मुद्दों पर प्राथमिकता
  • अमेरिका-यूरोप संबंधों में बढ़ती दरार को चुपचाप देखना

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