उत्तर प्रदेश में SIR के बाद 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटे, विपक्ष ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) के बाद 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए। जानिए कारण, आंकड़े, शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा कटौती और विपक्ष की प्रतिक्रिया।
Names Removed From Uttar Pradesh Voter List: भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) के बाद मतदाता सूची में अब तक की सबसे बड़ी कटौती सामने आई है। निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, राज्य की पुरानी सूची से 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 18.70% है।

यह आंकड़ा पूरे देश में अब तक किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में हुए SIR के दौरान संख्या के लिहाज़ से सबसे अधिक है। प्रतिशत के मामले में केवल अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह उत्तर प्रदेश से आगे है।
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क्यों हटाए गए 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के अनुसार, वर्ष 2025 की मतदाता सूची में कुल 15.44 करोड़ वोटर दर्ज थे। SIR प्रक्रिया के बाद इनमें से 12.55 करोड़ नामों को ड्राफ्ट लिस्ट में बनाए रखा गया, जबकि शेष नाम हटाए गए।
हटाए गए मतदाताओं के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
- 46.23 लाख (2.99%) मतदाताओं की मृत्यु
- 2.17 करोड़ (14.06%) मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए या सत्यापन के समय उपलब्ध नहीं थे।
- 25.47 लाख (1.65%) मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से की गई।

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शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा नाम कटे
SIR के दौरान यह सामने आया कि शहरी क्षेत्रों में नाम कटने की दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में कहीं अधिक रही। खासतौर पर बड़े शहरों और औद्योगिक जिलों में भारी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए।
प्रमुख जिले जहां सबसे ज्यादा कटौती हुई:
- लखनऊ – लगभग 30%
- गाजियाबाद – 28%
- गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) – 23.7%
- प्रयागराज – 24%
- कानपुर -25%
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में माइग्रेशन, किराए पर रहना और बार-बार पता बदलना इसका बड़ा कारण है।
विपक्ष का आरोप – गलत तरीके से काटे गए नाम
इस बड़े पैमाने पर हुई कटौती को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि SIR के तहत चुनिंदा वर्गों, विशेषकर OBC और हाशिए पर मौजूद समुदायों के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं।
कांग्रेस नेता अनिल यादव ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और CWC के स्थायी आमंत्रित सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल का नाम भी ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया है। कांग्रेस ने इसे “पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया” बताते हुए उत्तर प्रदेश में जन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
विपक्ष का यह भी कहना है कि मतदाता अगर राज्य के भीतर ही स्थान बदलता है, तो भी नाम काट दिया गया, और अब प्रमाण देने का पूरा बोझ आम नागरिक पर डाल दिया गया है।
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दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू
ड्राफ्ट सूची जारी होने के साथ ही अब एक महीने का क्लेम और ऑब्जेक्शन पीरियड शुरू हो गया है। जिन मतदाताओं ने गणना फॉर्म भरा है लेकिन जिनका नाम 2003 की सूची से मैप नहीं हो पाया, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। इसके लिए ECI द्वारा तय 12 वैध दस्तावेज़ों में से कोई एक प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

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प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या घटाई गई
भविष्य के चुनावों को सुचारु बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रति मतदान केंद्र मतदाताओं की सीमा 1500 से घटाकर 1200 कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य में 15,030 नए पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं।
पूरे अभियान में:
- 1,72,486 बूथ शामिल रहे
- 5,76,611 बूथ लेवल एजेंट (राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त)
- 62 दिन में प्रक्रिया पूरी हुई, जिसमें तीन बार समय बढ़ाया गया



