पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और हमास नेताओं की गुप्त बैठक, आतंकी गठजोड़ के गहराते संकेत
पाकिस्तान में हमास और लश्कर-ए-तैयबा नेताओं की मुलाकात से अंतरराष्ट्रीय आतंक नेटवर्क के गहराते रिश्तों का खुलासा हुआ है।
Pakistan Hamas Lashkar Terror Nexus: पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के केंद्र के रूप में सुर्खियों में है।

हाल ही में सामने आए एक वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान की ज़मीन पर हमास और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के बीच न केवल संपर्क है, बल्कि आपसी समन्वय भी तेज़ी से बढ़ रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक समुदाय पाकिस्तान की भूमिका पर पहले से ही सवाल उठा रहा है।
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पाकिस्तान में हमास-लश्कर की मंच साझा करती तस्वीरें
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी ज़हीर और लश्कर-ए-तैयबा कमांडर राशिद अली संधू को एक ही मंच पर देखा गया। यह कार्यक्रम पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसे व्यापक रूप से लश्कर-ए-तैयबा का राजनीतिक मुखौटा माना जाता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नाजी ज़हीर इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे, जबकि राशिद संधू PMML के नेता के रूप में मंच पर मौजूद थे। दोनों अमेरिकी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के नेताओं की यह सार्वजनिक मौजूदगी पाकिस्तान में आतंकवाद को मिलने वाले संरक्षण पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
हमास नेता नाजी ज़हीर के पाकिस्तान कनेक्शन
नाजी ज़हीर का पाकिस्तान से रिश्ता नया नहीं है। फरवरी 2025 में वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पहुंचे थे, जहां उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों के साथ भारत विरोधी रैली को संबोधित किया। यह दौरा पहलगाम आतंकी हमले से कुछ ही हफ्ते पहले हुआ था, जिसने इस यात्रा को और भी संदिग्ध बना दिया।
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इससे पहले जनवरी 2024 में ज़हीर ने कराची प्रेस क्लब में मीडिया को संबोधित किया। अप्रैल 2024 में वह इस्लामाबाद गए, जहां उन्हें इस्लामाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया।
7 अक्टूबर 2023 को इज़रायल पर हुए हमास हमले के ठीक एक सप्ताह बाद ज़हीर ने पाकिस्तान का दौरा किया और मौलाना फ़ज़ल-उर-रहमान से मुलाकात की। उसी दिन उन्होंने पेशावर में आयोजित मुफ़्ती महमूद कॉन्फ़्रेंस को भी संबोधित किया, जिसमें हमास नेता खालिद मशाल वीडियो लिंक से जुड़े थे।

पाकिस्तान का ‘डीप स्टेट’ और वैश्विक खतरा
इन लगातार दौरों और सार्वजनिक आयोजनों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान में हमास से जुड़े तत्वों को न केवल खुली छूट दी जा रही है, बल्कि उन्हें संस्थागत समर्थन भी प्राप्त है। इसे पाकिस्तान के तथाकथित “डीप स्टेट” की सक्रिय भूमिका के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सेना, खुफिया एजेंसियां और कट्टरपंथी संगठन शामिल माने जाते हैं।
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यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका भविष्य में गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा योजना में पाकिस्तान सेना की भूमिका की भी चर्चा है। ऐसे में हमास और लश्कर के साथ पाकिस्तान की नज़दीकी उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।



