अमेरिका का वेनेज़ुएला पर हमला: राष्ट्रपति निकोलस मादुरो हिरासत में, डेल्सी रोड्रिगेज बनीं कार्यवाहक राष्ट्रपति
अमेरिका ने वेनेज़ुएला में सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया। डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। चीन, उत्तर कोरिया और श्रीलंका ने इस कदम की कड़ी निंदा की।
US Venezuela Attack: जनवरी 2026 की शुरुआत वैश्विक राजनीति के लिए एक बड़े भू-राजनीतिक भूचाल के रूप में हुई, जब अमेरिका ने वेनेज़ुएला में सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया।

यह ऑपरेशन शनिवार तड़के अंजाम दिया गया, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने “नार्को-टेररिज़्म” के खिलाफ कार्रवाई बताया है। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद वेनेज़ुएला की सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक चैंबर ने उप-राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त करने का आदेश जारी किया।
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अमेरिकी कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी
अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा चलाए गए इस “अचानक और चौंकाने वाले” ऑपरेशन में राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को वेनेज़ुएला से बाहर ले जाया गया। बाद में पुष्टि हुई कि उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन पर “नार्को-टेररिज़्म साजिश” से जुड़े आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा।
हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन के लिए अमेरिकी कांग्रेस की पूर्व अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने इस कार्रवाई को अमेरिका में अवैध ड्रग्स की सप्लाई रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
डेल्सी रोड्रिगेज की ताजपोशी और संवैधानिक संकट
वेनेज़ुएला की सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक चैंबर ने शनिवार को आदेश जारी कर कहा कि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में डेल्सी रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभालेंगी।
टीवी पर देश को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने अमेरिका से मादुरो को तत्काल रिहा करने की मांग की और उन्हें “वेनेज़ुएला का एकमात्र वैध राष्ट्रपति” बताया। उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई को देश की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया।
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ट्रंप का बयान: ‘अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेज़ुएला चलाएगा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन के बाद दिए गए बयान में कहा कि अमेरिका फिलहाल वेनेज़ुएला का प्रशासन अस्थायी रूप से संभालेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका वेनेज़ुएला के विशाल तेल भंडारों का उपयोग कर उन्हें अन्य देशों को बेच सकता है।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका किसी संप्रभु देश का प्रशासन अपने हाथ में ले सकता है।

चीन, उत्तर कोरिया और श्रीलंका का तीखा विरोध
इस घटनाक्रम पर वैश्विक प्रतिक्रिया भी तेजी से सामने आई। चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से मांग की कि वह निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करे।
वहीं उत्तर कोरिया ने अमेरिकी कार्रवाई को “संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन” बताते हुए इसे अमेरिकी “दादागिरी” का उदाहरण करार दिया।
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दक्षिण एशिया से भी प्रतिक्रिया आई। श्रीलंका की सत्तारूढ़ पार्टी जनथा विमुक्ति पेरामुना (JVP) ने अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी भी ताकतवर देश को दूसरे राष्ट्र की संप्रभुता का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।
वैश्विक राजनीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का वेनेज़ुएला पर हमला लैटिन अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तेल, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून—तीनों मोर्चों पर इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाएं इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं।



