I-PAC रेड केस: ED पर FIR पर SC की रोक, ममता सरकार को नोटिस – संवैधानिक टकराव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC रेड मामले में ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर रोक लगाई। ममता सरकार से जवाब तलब, केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकारों के अधिकारों पर अहम टिप्पणी।

I-PAC Raid: I-PAC रेड मामले ने अब संवैधानिक संकट का रूप ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा (Prashant Kumar Mishra) और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ एक रेड तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

SC की दो टूक: न ED राजनीति में दखल दे, न राज्य एजेंसियां जांच रोकें

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक संतुलित लेकिन सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि:

  • ED को किसी भी तरह की चुनावी या राजनीतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
  • लेकिन राज्य सरकार या उसकी पुलिस एजेंसियों को भी केंद्रीय जांच में बाधा डालने का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इन सीमाओं का उल्लंघन होता है, तो यह अराजकता और संस्थागत टकराव को जन्म दे सकता है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

I-PAC Raid
I-PAC Raid

ED के गंभीर आरोप: CM की मौजूदगी, मोबाइल छीने जाने का दावा

ED की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने कोर्ट को बताया कि I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर रेड के दौरान खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं। ED के अनुसार:

  • मुख्यमंत्री के साथ पश्चिम बंगाल के DGP राजीव कुमार और पुलिस बल मौजूद था।
  • ED अधिकारियों के मोबाइल फोन छीन लिए गए।
  • कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज कथित तौर पर वहां से हटा लिए गए।
  • मुख्यमंत्री मीडिया के सामने आईं, जिससे जांच की गोपनीयता प्रभावित हुई।

SG ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से ED के काम में गंभीर बाधा और अधिकारियों का मनोबल गिरा।

राज्य के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

ED ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि:

  • DGP राजीव कुमार और
  • कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा

को तुरंत निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ FIR दर्ज हो। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि ED ने आर्टिकल 21 के तहत अपने अधिकारियों की सुरक्षा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

CBI जांच और राज्य से बाहर ट्रांसफर की मांग

अगर केस CBI को सौंपा जाता है, तो जांच को पश्चिम बंगाल से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे निष्पक्षता बनी रहे। ED ने यह भी आरोप लगाया कि:

  • पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में भीड़ जुटाई गई।
  • माइक्रोफोन बार-बार बंद हो रहा था।
  • हालात इतने बिगड़े कि एक्टिंग चीफ जस्टिस को आदेश देना पड़ा कि सिर्फ वकीलों को ही एंट्री दी जाए। 

2742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है मामला

I-PAC रेड का सीधा संबंध कोयला तस्करी से जुड़े 2742 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस से है।

  • CBI ने 27 नवंबर 2020 को इस मामले में FIR दर्ज की थी।
  • ED ने 28 नवंबर 2020 से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
  • इसी केस में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापा मारा गया था।

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सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश, 3 फरवरी को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि:

  • रेड से जुड़ी CCTV फुटेज
  • सर्च रिकॉर्डिंग वाले सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे की सुनवाई में कोई सबूत प्रभावित न हो। कोर्ट ने 3 फरवरी तक ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक जारी रखी है और उसी दिन अगली सुनवाई होगी।

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