महाराष्ट्र निकाय चुनाव: महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध विजयी, BJP के 44 प्रत्याशी शामिल
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए, जिनमें 44 भाजपा के हैं। जानिए किन शहरों में भाजपा का दबदबा और इसके राजनीतिक मायने।
Maharashtra Local Body Elections 2026: महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सहयोगी महायुति ने बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल कर ली है।

राज्य भर में महायुति के कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से 44 उम्मीदवार अकेले BJP से हैं। मतदान 15 जनवरी 2026 को होना है, लेकिन उससे पहले ही यह परिणाम महायुति की शहरी राजनीति में मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
भाजपा के राज्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने जानकारी देते हुए कहा कि यह जीत शहरी मतदाताओं के बीच पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। उनका कहना है कि यह रुझान आने वाले चुनावी नतीजों की दिशा भी तय कर सकता है।
इन नगर निगमों में BJP का सबसे अधिक दबदबा
निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में सबसे अधिक संख्या ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका से सामने आई है। इसके बाद पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों का स्थान है।
विशेष रूप से पुणे नगर निगम में भाजपा के उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप (वार्ड नंबर 35) निर्विरोध चुने गए। दोनों इससे पहले 2017 से 2022 तक इसी वार्ड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनके विरोधियों द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद यह स्थिति बनी।
पुणे में मेयर BJP का होगा: मुरलीधर मोहोल
इन जीतों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल ने दावा किया कि पुणे का अगला मेयर भाजपा से ही होगा। उन्होंने कहा,
“हमारा लक्ष्य 125 सीटों का है, जिनमें से दो सीटें हम पहले ही निर्विरोध जीत चुके हैं। यह हमारी सरकार के अच्छे प्रशासन का प्रमाण है।”
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उनके इस बयान से साफ है कि भाजपा न सिर्फ जीत को लेकर आश्वस्त है, बल्कि शहरी निकायों में नेतृत्व की भूमिका भी अपने हाथ में रखना चाहती है।

सहयोगी दलों का भी रहा प्रदर्शन
महायुति में शामिल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 22 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जबकि अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 2 उम्मीदवार इस श्रेणी में आए हैं।
हालांकि संख्या के लिहाज से भाजपा आगे है, लेकिन यह परिणाम दिखाते हैं कि महायुति के सभी घटक दलों को शहरी क्षेत्रों में लाभ मिला है।
भाजपा की सफलता के पीछे क्या हैं कारण?
भाजपा नेताओं के अनुसार, इस सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता
- राज्य भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की प्रभावी चुनावी रणनीति
- शहरी विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे पर सरकार का फोकस
- विपक्ष की कमजोर संगठनात्मक स्थिति
इन सभी कारणों ने मिलकर भाजपा को न सिर्फ नगर परिषदों बल्कि बड़े नगर निगमों में भी एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बना दिया है।
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आगे क्या संकेत देते हैं ये नतीजे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर निर्विरोध जीत यह संकेत देती है कि विपक्ष कई जगहों पर चुनावी मुकाबले के लिए तैयार नहीं है। यह रुझान आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है।



