‘मैं भिखारी नहीं हूं…’ करोड़पति भिखारी मांगीलाल केस में बड़ा खुलासा, प्रशासन बनाम परिवार आमने-सामने

इंदौर के कथित ‘करोड़पति भिखारी’ मांगीलाल केस में बड़ा ट्विस्ट। परिवार ने प्रशासन के दावों को बताया गलत, जांच के आदेश। जानिए पूरा सच।

Indore Millionaire Beggar Mangilal Case: इंदौर में सामने आए तथाकथित ‘करोड़पति भिखारी’ मांगीलाल केस ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। प्रशासन द्वारा भिखारी बताकर रेस्क्यू किए गए कुष्ठ रोग से पीड़ित मांगीलाल को लेकर अब उनके परिजन खुलकर सामने आ गए हैं। परिजनों का दावा है कि मांगीलाल भिखारी नहीं हैं, बल्कि उनकी तस्वीरें गलत तरीके से वायरल कर दी गईं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब इंदौर प्रशासन ने शहर को भिखारी-मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया और सराफा बाजार से मांगीलाल को रेस्क्यू कर आश्रय गृह भेज दिया।

प्रशासन का दावा: करोड़ों की संपत्ति और भीख से कमाई

प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि मांगीलाल के पास तीन पक्के मकान, जिनमें एक तीन मंजिला इमारत शामिल है, मौजूद हैं। इसके अलावा उनके नाम पर तीन ऑटो-रिक्शा और एक कार भी दर्ज है, जिसे किराए पर चलाया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि मांगीलाल 2021-22 से सराफा बाजार में भीख मांग रहा था। भीख उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा के अनुसार, मांगीलाल ने सराफा बाजार में 4 से 5 लाख रुपये ब्याज पर दे रखे थे, जिससे उन्हें रोजाना 1000 से 2000 रुपये की आमदनी होती थी। साथ ही भीख से भी रोज 400-500 रुपये की कमाई होने का दावा किया गया। इन दावों के बाद सोशल मीडिया पर मांगीलाल को ‘लखपति’ और ‘करोड़पति भिखारी’ कहकर वायरल किया जाने लगा।

Indore Millionaire Beggar Mangilal Case
Indore Millionaire Beggar Mangilal Case

परिवार का पलटवार: “मेरे चाचा भिखारी नहीं हैं”

मांगीलाल के भतीजे ने प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके चाचा भिखारी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब उनकी मुलाकात मांगीलाल से आश्रय गृह में हुई, तो मांगीलाल ने साफ कहा-
“मैं भीख नहीं मांगता, मैं अपने पैसे वसूलने जाता था।” भतीजे का कहना है कि प्रशासन जिन संपत्तियों को मांगीलाल के नाम बता रहा है, वे वास्तव में परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं।

  • तीन मंजिला मकान उनकी मां के नाम है।
  • उस मकान का लोन वे खुद चुका रहे हैं।
  • सभी दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद हैं। 

उन्होंने यह भी बताया कि एक अन्य मकान को लेकर परिवार का विवाद न्यायालय में लंबित है, जिसे गलत तरीके से मांगीलाल से जोड़ा जा रहा है।

भीख नहीं, सराफा बाजार में वसूली की सच्चाई

परिजनों के अनुसार, मांगीलाल सराफा बाजार में भीख मांगने नहीं जाते थे। वे बुलियन मार्केट में छोटे कारोबारियों को उधार दिए गए पैसों की वसूली के लिए वहां बैठते थे। कुष्ठ रोग के कारण वे चल-फिर नहीं पाते और पहियों वाले तख्ते पर रहते हैं। इसी शारीरिक स्थिति के कारण लोगों को भ्रम हुआ कि वे भिखारी हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गईं। परिवार का कहना है कि यह गलतफहमी और जल्दबाजी में बनाया गया नैरेटिव है।

एनजीओ की राय: यह सिर्फ कानून नहीं, मानवीय मामला है

भीख उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाली एनजीओ ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रूपाली जैन ने प्रशासन से अलग दृष्टिकोण रखा है। उनके अनुसार, मांगीलाल कुछ साल पहले तक राजमिस्त्री का काम करते थे, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण उनकी उंगलियां और पैर बुरी तरह प्रभावित हो गए। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी कुष्ठ रोग को कलंक की तरह देखा जाता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति का पुनर्वास बेहद कठिन हो जाता है। एनजीओ का दावा है कि मांगीलाल को पहले भी दो बार भीख छोड़ने के लिए समझाया गया था, लेकिन बीमारी और सामाजिक उपेक्षा के कारण वे फिर उसी हालात में लौट आए।

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कलेक्टर का बयान: जांच के बाद ही होगा फैसला

इंदौर के जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रशासन को मांगीलाल की संपत्तियों को लेकर प्रारंभिक जानकारी मिली है, लेकिन सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना सत्यापन के किसी को दोषी या निर्दोष नहीं ठहराया जाएगा। कलेक्टर ने यह भी दोहराया कि इंदौर में भीख मांगना, भीख देना और इससे जुड़ा कोई भी लेन-देन कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।

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