राजस्थान में मौत का तांडव: अलवर की फैक्ट्री में भीषण धमाका, 7 मजदूर जिंदा जले; मंजर देख कांप उठी रूह!

राजस्थान के अलवर (खुशखेड़ा) में एक बंद पड़ी फैक्ट्री में भीषण धमाके के बाद लगी आग में 7 लोगों की मौत। जानें क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा।

Alwar Factory Fire: राजस्थान (Rajasthan) के औद्योगिक हब कहे जाने वाले अलवर (Alwar) जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह एक बंद पड़ी फैक्ट्री में अचानक हुए जोरदार धमाकों ने मौत का तांडव मचा दिया। इस भीषण अग्निकांड में फैक्ट्री के भीतर काम कर रहे 7 लोगों की जिंदा जलने से दर्दनाक मौत हो गई है। धमाका इतना तेज था कि आसपास की फैक्ट्रियों की धरती हिल गई और आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया।

धमाकों से दहला खुशखेड़ा (Khushkheda shaken by blasts): बंद फैक्ट्री बनी ‘डेथ ट्रैप’ (A closed factory has become a death trap)

घटना खुशखेड़ा (Khushkheda) औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नंबर G-1, 118 की है। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री पिछले कई महीनों से बंद पड़ी थी, लेकिन इसके भीतर भारी मात्रा में गत्तों (Cardboard) का स्टॉक जमा था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे जब क्षेत्र में सामान्य कामकाज चल रहा था, तभी अचानक फैक्ट्री के भीतर से आग की लपटें निकलने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार (According to eyewitnesses), आग लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर फैक्ट्री के अंदर एक के बाद एक 3 से 4 जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों की गूँज इतनी भीषण थी कि दूर-दराज के इलाकों में भी दहशत फैल गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए सड़कों पर दौड़ने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाकों के कारण फैक्ट्री की दीवारों में दरारें आ गईं और आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया।

Alwar Factory Fire
Alwar Factory Fire

रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue operation): 9 लोग फंसे थे, 7 के मिले शव (9 people were trapped, bodies of 7 found)

आग की सूचना मिलते ही भिवाड़ी पुलिस और दमकल विभाग की टीमें हरकत में आईं। दमकल इंचार्ज राजू खान ने बताया कि आधा दर्जन से ज्यादा दमकल की गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। लेकिन फैक्ट्री में गत्ते का स्टॉक होने के कारण आग पर काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। अतिरिक्त जिलाधिकारी सुमिता मिश्रा ने मीडिया को जानकारी दी कि पुलिस की नियमित गश्त टीम ने सबसे पहले कारखाने से धुआं निकलता देखा था। जब तक बचाव कार्य शुरू हुआ, आग पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले चुकी थी। जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त फैक्ट्री के अंदर 9 लोग फंसे हुए थे, जिनमें से अब तक 7 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस अधीक्षक (SP) प्रशांत किरण ने भी 7 मौतों की पुष्टि की है और मृतकों की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।

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आखिर क्यों हुए धमाके (Why did the explosions happen)? जाँच में जुटी पुलिस और प्रशासन (Police and administration engaged in investigation)

इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि “अगर फैक्ट्री महीनों से बंद थी, तो वहां 9 लोग क्या कर रहे थे?” और “बंद फैक्ट्री में धमाका किस चीज का हुआ?” प्राथमिक जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि फैक्ट्री के अंदर रखे गैस सिलेंडर फटने के कारण ये सिलसिलेवार धमाके हुए। हालांकि, भिवाड़ी पुलिस और जिला प्रशासन हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है।

  • शॉर्ट सर्किट (Short circuit): क्या आग बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट से लगी?
  • अवैध काम की आशंका (Suspicion of illegal activities): क्या बंद फैक्ट्री की आड़ में अंदर कोई ज्वलनशील पदार्थ बनाया जा रहा था?
  • लापरवाही (Negligence): सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस बड़े हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है।

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास की फैक्ट्रियों को खाली करा लिया है और पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति काट दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस घटना पर संज्ञान लिया है और घायलों व मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

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