ज्ञानेश कुमार को शुभेंदु अधिकारी का पलटवार: ममता बनर्जी के सभी आरोपों का खंडन, SIR प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

ज्ञानेश कुमार को शुभेंदु अधिकारी का चार पन्नों का पत्र, ममता बनर्जी के SIR आरोपों का खंडन, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को बताया वैध और पारदर्शी।

Shubhendu Adhikari Letter: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजे गए पत्र के जवाब में अब विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी एक विस्तृत पत्र लिखकर अपने रुख की स्पष्ट घोषणा की है।

Shubhendu Adhikari Letter
Shubhendu Adhikari Letter

सोमवार को दिल्ली से भेजे गए इस चार पन्नों के पत्र में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चुनाव आयोग द्वारा चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह वैध और पारदर्शी बताया है।

शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की है और उनके आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की है कि वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।

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SIR प्रक्रिया पर प्रशिक्षण और तैयारी को लेकर आरोपों का खंडन

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि SIR प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया गया है और इसमें शामिल कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया था कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में यह प्रक्रिया अलग-अलग तरीके से अपनाई जा रही है, जिससे मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका है।

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने लिखा कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक है। उनके अनुसार, SIR प्रक्रिया को देशभर में व्यापक चर्चा और योजना के बाद लागू किया गया है। केवल पश्चिम बंगाल में ही लगभग 50,000 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। शुभेंदु ने इसे अब तक की सबसे संगठित मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया बताया।

Shubhendu Adhikari Letter
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उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के इस तरह के आरोप चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं। 

बिहार और बंगाल के नियमों पर विवाद, संघीय ढांचे की दलील 

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया था कि SIR प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में फैमिली रजिस्टर को वैध पहचान पत्र माना जा रहा है, जबकि बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा।

इस मुद्दे पर शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य-विशेष परिस्थितियों के आधार पर नियमों में अंतर होना स्वेच्छाचारिता नहीं, बल्कि भारत के संघीय ढांचे का स्वाभाविक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या संरचना, प्रवासन और स्थानीय प्रशासनिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग राज्यों के लिए अलग दिशा-निर्देश तय करता है।

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शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, इस तथ्य को नजरअंदाज कर ममता बनर्जी जानबूझकर एक संवैधानिक प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही हैं।

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