Q3FY26 Earnings Preview: ये 6 बड़े फैक्टर तय करेंगे कंपनियों की कमाई की दिशा, निवेशकों के लिए अहम संकेत
Q3FY26 earnings season शुरू होने वाला है। GDP growth, GST overhaul, RBI rate cuts, inflation, rupee depreciation और tariffs जैसे 6 बड़े फैक्टर इस तिमाही की कॉरपोरेट कमाई को प्रभावित करेंगे। पूरी जानकारी पढ़ें।
Q3FY26 Earnings Preview: भारत में Q3FY26 का earnings season अगले सप्ताह से शुरू होने जा रहा है। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां TCS और HCL Tech अपने नतीजे घोषित करेंगी, जिसके साथ ही बाजार की नजरें कॉरपोरेट प्रदर्शन पर टिक जाएंगी। यह तिमाही इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह GST overhaul और टैक्स कट्स के बाद की पहली earnings season है।

निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि GST में कटौती, ब्याज दरों में कमी और मजबूत आर्थिक ग्रोथ का असर कंपनियों की कमाई पर कितना पड़ा है। इस तिमाही की earnings को प्रभावित करने वाले छह प्रमुख फैक्टर नीचे विस्तार से समझे जा सकते हैं।
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1. मजबूत GDP ग्रोथ से मिलेगी कमाई को रफ्तार
भारत फिलहाल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। FY26 की पहली दो तिमाहियों में GDP growth क्रमशः 7.8% और 8.2% रही। वहीं RBI के ताजा अनुमान के अनुसार, Q3FY26 में 7.4% और Q4 में 6.5% की वृद्धि दर्ज हो सकती है।
IMF के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए $4.16 ट्रिलियन के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल कर लिया है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो GDP और कॉरपोरेट earnings के बीच 0.6 का सकारात्मक सहसंबंध रहा है। FY20 से FY25 के उच्च विकास चरण में कॉरपोरेट मुनाफा GDP की तुलना में तीन गुना तेजी से बढ़ा था, जिसका असर Q3FY26 में भी दिख सकता है।

2. कम महंगाई से मांग बनी रही मजबूत
Q3FY26 के दौरान महंगाई का स्तर काफी नरम बना रहा। अच्छी मानसून स्थिति के कारण खाद्य कीमतें नियंत्रण में रहीं, जिससे CPI inflation में गिरावट आई। अक्टूबर में CPI महज 0.25% पर आ गई, जो GST कट्स और खाद्य कीमतों में तेज गिरावट का नतीजा था।
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हालांकि दिसंबर में CPI inflation के 1.6% तक हल्का बढ़ने का अनुमान है, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई निम्न स्तर पर बनी हुई है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने इंडस्ट्रियल सेक्टर की लागत को भी कम रखा। कम महंगाई का सीधा फायदा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपभोक्ता मांग के रूप में देखने को मिला।
3. RBI Rate Cuts और GST Rejig से कमाई को सपोर्ट
कम महंगाई को देखते हुए RBI ने 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर कटौती की। इसका असर Q3FY26 की earnings में दिखने की पूरी संभावना है। सस्ती ब्याज दरों से क्रेडिट ग्रोथ बढ़ी, उपभोक्ताओं पर EMI का बोझ घटा और डिमांड में सुधार हुआ।
इसके साथ ही RBI ने CRR में 100 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाई। इसका सीधा फायदा बैंकों और NBFCs को बेहतर मार्जिन के रूप में मिल सकता है।

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इसी तिमाही में लागू हुआ GST rationalisation भी earnings के लिए बड़ा पॉजिटिव फैक्टर है। ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और अन्य डिस्क्रिशनरी सेक्टर में टैक्स कटौती से डिमांड बढ़ी है। Crisil Intelligence के अनुसार, GST rejig से FY26 में 6–7% अतिरिक्त रेवेन्यू ग्रोथ संभव है।
4. रुपये की कमजोरी और टैरिफ बने चुनौती
हालांकि सभी संकेत सकारात्मक नहीं हैं। रुपये की कमजोरी का असर आयात-निर्भर सेक्टर्स पर नकारात्मक पड़ा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और वे कंपनियां जिन पर external commercial borrowing ज्यादा है, उनकी लागत बढ़ी है।
दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और रूसी तेल पर संभावित प्रतिबंधों की आशंका से निवेशकों की चिंता बनी हुई है। टेक्सटाइल, फिशरीज, जेम्स एंड ज्वेलरी, फुटवियर और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर्स पर इसका मध्यम से उच्च प्रभाव पड़ सकता है।



