Silver Price Crash: रिकॉर्ड हाई के बाद चांदी में ऐतिहासिक गिरावट, एक घंटे में ₹21,000 टूटे दाम – आगे क्या रहेगा आउटलुक?
Silver Price Crash: MCX पर रिकॉर्ड ₹2.5 लाख प्रति किलो के स्तर के बाद चांदी में तेज गिरावट दर्ज की गई। जानिए गिरावट की वजह, टेक्निकल आउटलुक, सपोर्ट लेवल और निवेशकों के लिए आगे की रणनीति।
Silver Price Crash: सोमवार को कमोडिटी बाजार में चांदी ने ऐसा उतार-चढ़ाव दिखाया, जिसने निवेशकों को चौंका दिया।

MCX Silver March Futures ने जहां दिन की शुरुआत रिकॉर्ड तेजी के साथ की, वहीं कुछ ही घंटों में मुनाफावसूली के दबाव में चांदी की कीमतों में ₹21,000 प्रति किलो की भारी गिरावट आ गई। सुबह के सत्र में ₹2.54 लाख प्रति किलो का लाइफटाइम हाई छूने के बाद, चांदी फिसलकर ₹2.33 लाख प्रति किलो के निचले स्तर तक पहुंच गई।
इसे भी पढें: “मैं खुद पर बहुत सख्त रहती हूं” – श्रीलंका पर 4-0 की बढ़त के बाद स्मृति मंधाना का बड़ा बयान
रिकॉर्ड रैली के बाद क्यों टूटी चांदी?
Silver Price Crash की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली (Profit Booking) मानी जा रही है। साल 2025 में अब तक चांदी करीब 181% की जबरदस्त तेजी दिखा चुकी थी, जिससे कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर अपने मुनाफे को सुरक्षित करना बेहतर समझा।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भी चांदी में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी पहली बार $80 प्रति औंस के ऊपर गई, लेकिन वहां टिक नहीं सकी और तेजी से फिसलकर $75 से नीचे आ गई। इस तेज रिवर्सल ने घरेलू बाजार पर भी दबाव बनाया।
एक अन्य अहम कारण भू-राजनीतिक माहौल में नरमी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग को कमजोर किया, जिससे बुलियन मार्केट में बिकवाली तेज हुई।
CME के फैसले और टेक्निकल संकेतों ने बढ़ाया दबाव
चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ने की एक और बड़ी वजह Chicago Mercantile Exchange (CME) का फैसला रहा। CME ने मार्च 2026 सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर मार्जिन बढ़ाकर करीब $25,000 कर दिया, जो पहले $20,000 था। मार्जिन बढ़ने से ट्रेडर्स की लागत बढ़ जाती है, जिससे शॉर्ट-टर्म में बिकवाली का दबाव बनता है।
टेक्निकल नजरिए से भी चांदी काफी ज्यादा ओवरबॉट स्थिति में पहुंच चुकी थी। फिलहाल सिल्वर अपने 200-डे मूविंग एवरेज से लगभग 89% ऊपर ट्रेड कर रही थी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इतिहास में जब भी चांदी 200-DMA से 60% से ज्यादा ऊपर गई है, उसके बाद आने वाले 20–40 दिनों में कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है।
इसे भी पढें: पवार परिवार की राजनीति में बड़ी वापसी: नगर निगम चुनाव में फिर साथ आए शरद पवार और अजित पवार
आगे क्या रहेगा Silver Outlook? निवेशकों के लिए रणनीति
हालांकि मौजूदा गिरावट ने बाजार में घबराहट बढ़ाई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुआ है। रिलायंस सिक्योरिटीज के अनुसार, ₹2.40 लाख प्रति किलो का स्तर फिलहाल चांदी के लिए अहम सपोर्ट के रूप में उभर रहा है।
वहीं, BTIG जैसी वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी है कि चांदी की तेजी “Parabolic Rally” जैसी हो चुकी थी, जो आमतौर पर तेज और दर्दनाक करेक्शन के साथ खत्म होती है। इतिहास इस बात का गवाह है कि 1979–80 और 2011 में चांदी ने रिकॉर्ड तेजी के बाद 75% से 90% तक की गिरावट देखी थी।

इसे भी पढें: पश्चिम बंगाल में ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं पर सुनवाई पर EC का सशर्त ब्रेक
ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के CIO मनीष बंथिया का कहना है कि महामारी के बाद से चांदी की कीमतें छह गुना से ज्यादा बढ़ चुकी हैं और पिछले एक साल में ही लगभग तीन गुना उछाल आया है। ऐसे में, यदि तेजी की रफ्तार कमजोर पड़ती है, तो 50% या उससे ज्यादा का करेक्शन भी असामान्य नहीं होगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
Silver Price Crash ने साफ कर दिया है कि चांदी में तेजी के साथ जोखिम भी उतना ही बड़ा है। शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और निवेशकों को अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है। लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की रणनीति अपना सकते हैं, जबकि ट्रेडर्स के लिए सख्त स्टॉप-लॉस बेहद जरूरी है।
चांदी का भविष्य अब काफी हद तक वैश्विक भू-राजनीति, औद्योगिक मांग और तकनीकी संकेतों पर निर्भर करेगा। फिलहाल बाजार में स्थिरता लौटने तक धैर्य ही सबसे बड़ी रणनीति साबित हो सकती है।
Vihantv.com: Click Here



