सतना में मंत्री के भाई की गिरफ्तारी पर प्रदेश में भूचाल,लेकिन रीवा कांग्रेस की चुप्पी ने खड़े किए सवाल

सतना में मंत्री प्रतिमा बागरी (Pratima Bagari) के भाई की गांजा तस्करी में गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रदेश में इस्तीफे की मांग तेज, लेकिन रीवा कांग्रेस (Rewa Congress) की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।

सतना (Satna) में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी (Pratima Bagari) के भाई अनिल बागरी (Anil Bagari) की गांजा तस्करी के मामले में गिरफ्तारी ने पूरे मध्यप्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मामले के सामने आते ही प्रदेशभर में सरकार पर तीखे सवाल उठने लगे और विपक्ष ने बिना देर किए मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। लेकिन इस बड़े और गंभीर मुद्दे के बीच जिस चुप्पी ने लोगों को सबसे ज्यादा हैरान किया है, वह है-रीवा कांग्रेस की गहरी खामोशी।
प्रदेश की राजनीति जहां इस गिरफ्तारी को लेकर गर्माई हुई है, वहीं रीवा कांग्रेस का मौन अब चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुका है।

सतना में बड़ी कार्रवाई-लेकिन रीवा कांग्रेस क्यों मौन?
अनिल बागरी (Anil Bagari) की गिरफ्तारी कोई सामान्य मामला नहीं है। आरोप गंभीर हैं और प्रदेशभर में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को सीधे चुनौती देने वाले हैं। ऐसे में स्वाभाविक था कि रीवा जिला कांग्रेस, जो अक्सर नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने में सबसे आगे रहती है, इस बार भी मुखर दिखाई देगी।
लेकिन इसके ठीक उलट,रीवा कांग्रेस पूरी तरह शांत दिखाई दे रही है। न कोई आधिकारिक बयान, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, न कोई विरोध इस चुप्पी ने आम लोगों से लेकर राजनीतिक जानकारों तक सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।

वो नेता जो नशा मुद्दे पर मुखर थे-अब सन्नाटे में क्यों?
रीवा (Rewa) कांग्रेस के कई नेता पिछले महीनों में बार-बार यह कहते नजर आए थे कि
“रीवा (Rewa) में नशा बढ़ रहा है और सत्ता संरक्षण मिल रहा है।”
लेकिन जैसे ही पड़ोसी जिले सतना में राज्य मंत्री के भाई की गिरफ्तारी हुई, वही आवाजें अचानक गायब हो गईं।
विधायक अभय मिश्रा,जो हर राजनीतिक मुद्दे पर तेज बयानबाज़ी के लिए जाने जाते हैं, इस मामले पर एक भी टिप्पणी नहीं कर रहे।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा,जो छोटे-बड़े हर घटनाक्रम पर पत्रकारों के सामने आते हैं,पूरी तरह चुप हैं।
यूथ कांग्रेस,जो पोस्टर-बैनर के साथ सड़कों पर उतरने के लिए जानी जाती है, इस मुद्दे पर कहीं दिखाई नहीं दे रही।
ऐसे में जनता का सवाल बिल्कुल स्वाभाविक है- क्या रीवा कांग्रेस चुनकर बोलती है?
या फिर यह मुद्दा इतना बड़ा है कि आवाज़ दबा दी गई है?

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क्या यह चुप्पी रणनीति है,दबाव है या ‘समझौते’ का हिस्सा?
राजनीति में चुप्पी भी एक बयान होती है। लेकिन रीवा कांग्रेस (Rewa Congress) की चुप्पी ने कई शक पैदा कर दिए हैं।
कुछ राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं-
क्या कांग्रेस नेता इस मामले में बयान देने से बच रहे हैं?
क्या रीवा और सतना की राजनीति के बीच कोई ‘अदृश्य समझौता’ है?
या फिर यह कांग्रेस का कोई रणनीतिक मौन है, जिसे वे सही समय पर तोड़ना चाहते हैं?
यह भी संभव है कि स्थानीय नेता किसी बड़े राजनीतिक दबाव में हों। लेकिन जनता की नज़र में अब यह चुप्पी रीवा कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रही है।
क्योंकि जब हर रोज़ रीवा में नशे के मुद्दों पर बयान दिए जाते थे, तो इतने गंभीर और हाई-प्रोफाइल मामले पर बोलने में हिचक क्यों?

जनता का सबसे बड़ा सवाल-चयनात्मक राजनीति क्यों?
प्रदेशभर में मंत्री के खिलाफ इस्तीफे की मांग हो रही है।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंच तक हर जगह सवाल उठ रहे हैं कि जब रीवा कांग्रेस नशे के मुद्दे पर इतनी सक्रिय दिखती है, तो अब चुप्पी क्यों?
क्या वजह है कि जब चुनाव से जुड़े मुद्दे,
स्थानीय विवाद,या सरकारी निर्णय होते हैं, तब तो आवाज़ बुलंद रहती है, लेकिन जब मामला सत्ता के केंद्र के बेहद करीब पहुंचता है, तब सभी नेता सुरक्षित दूरी बना लेते हैं?

निष्कर्ष: क्या यह चुप्पी संयोग है या रणनीति?
रीवा कांग्रेस (Rewa Congress) की चुप्पी ने इस समय सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष की भूमिका यही है कि गलतियों और भ्रष्टाचार पर मुखर होकर आवाज़ उठाए, लेकिन यहां जो देखा जा रहा है वह इसके बिल्कुल विपरीत है।
अब जनता के मन में सिर्फ एक ही सवाल है-
क्या रीवा कांग्रेस (Rewa Congress) वाकई जनता के मुद्दों पर गंभीर है,
या फिर बयानबाज़ी सिर्फ तब होती है जब उससे राजनीतिक फायदा मिले?

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