सावधान! वीडियो कॉल उठाते ही हो सकता है ‘डिजिटल अरेस्ट’, MP में करोड़ों लूटने वाले सेक्सटॉर्शन गैंग का पर्दाफाश
मध्य प्रदेश पुलिस के 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' ने करोड़ों की उगाही करने वाले सेक्सटॉर्शन रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जानें कैसे 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 20 ठगों ने फैलाया था जाल।
MP Cyber Sextortion Racket Busted: मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। क्या आपने कभी सोचा है कि एक अनजान वीडियो कॉल आपकी बरसों की कमाई और इज्जत, दोनों को मिट्टी में मिला सकता है? शिवपुरी पुलिस ने ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत एक ऐसे ही अंतर्राज्यीय गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘सेक्सटॉर्शन’ के जरिए मासूम लोगों से करोड़ों रुपये वसूल रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के 20 शातिर सदस्यों को धर-दबोचा है, जबकि 12 अन्य की तलाश जारी है। इनके पास से करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की गई है। आइए जानते हैं इस काले खेल की पूरी इनसाइड स्टोरी।
‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’: 9 टीमें और एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी
ग्वालियर जोन के आईजी अरविंद कुमार सक्सेना और डीआईजी अमित सांघी के मार्गदर्शन में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। एसपी अमन सिंह राठौर के नेतृत्व में 9 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने शिवपुरी के करेरा, भोंटी और पिछोर इलाकों में एक साथ दबिश दी। पुलिस की इस मुस्तैदी का परिणाम यह रहा कि MP Cyber Sextortion Racket Busted के तहत 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित संपत्तियां जब्त की हैं:
- 7 लग्जरी चार पहिया वाहन
- 29 हाई-टेक स्मार्टफोन
- 1.20 लाख रुपये नकद
- भारी मात्रा में ATM कार्ड और बैंक पासबुक। जब्त की गई कुल संपत्ति की कीमत करीब 1.07 करोड़ रुपये आंकी गई है।

हसीन चेहरों का जाल और फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी
इस गैंग के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद प्रोफेशनल और डरावना था। जांच में सामने आया कि ये ठग डेटिंग और चैटिंग ऐप्स का सहारा लेते थे।
कैसे बुना जाता था जाल?
- फर्जी प्रोफाइल: आरोपी महिलाओं के नाम से फर्जी WhatsApp अकाउंट और सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाते थे।
- दोस्ती और अश्लील चैट: पहले मीठी बातों से दोस्ती की जाती, फिर वीडियो कॉल के जरिए अश्लील हरकतें रिकॉर्ड कर ली जाती थीं।
- नकली पुलिस अधिकारी: रिकॉर्डिंग होने के बाद असली खेल शुरू होता। ठग खुद को पुलिस अधिकारी या साइबर सेल का अफसर बताकर पीड़ित को फोन करते।
- रेप केस का डर: पीड़ित को डराया जाता कि उसके खिलाफ रेप या चाइल्ड पोर्नोग्राफी का केस दर्ज हुआ है और उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है।
डर और सामाजिक बदनामी के खौफ में आकर लोग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी इन ठगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे।
सेक्सटॉर्शन से कैसे बचें? पुलिस की खास अपील
शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौर ने जनता से अपील की है कि वे तकनीक का इस्तेमाल सावधानी से करें। इस गिरोह के पकड़े गए सदस्यों में अंगद लोधी, विशाल, सुखदेव और अर्जुन जैसे नाम शामिल हैं, जो शिवपुरी और झांसी के आसपास के इलाकों से ऑपरेट कर रहे थे।
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साइबर सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान:
- अनजान वीडियो कॉल न उठाएं: अगर आप किसी को नहीं जानते, तो उसका वीडियो कॉल रिसीव न करें।
- कैमरा कवर रखें: लैपटॉप या फोन का इस्तेमाल न होने पर कैमरे को ढक कर रखें।
- पैसे न दें: कोई भी असली पुलिस अधिकारी फोन पर पैसे की मांग या डिजिटल अरेस्ट की धमकी नहीं देता।
- तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो शर्मिंदा होने के बजाय तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।



