बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस: घाटों का सफर अब होगा और भी तेज़, जानें कब से शुरू होगी यह ‘हाई-स्पीड’ सेवा!
बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस का इंतजार जल्द खत्म होगा। रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेज दिया गया है। जानें ट्रायल रन, रूट और AEB सिस्टम से जुड़ी पूरी जानकारी।
Bengaluru Mangaluru Vande Bharat Express: कर्नाटक (Karnataka) के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। आईटी सिटी बेंगलुरु और तटीय शहर मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) अब अपने लॉन्चिंग के बेहद करीब है। एनडीटीवी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) ने इस रूट के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है और अब बस रेलवे बोर्ड की अंतिम हरी झंडी का इंतजार है। यह ट्रेन न केवल यात्रा के समय को कम करेगी, बल्कि पश्चिमी घाटों के खूबसूरत नजारों के बीच यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं भी प्रदान करेगी।
रेलवे बोर्ड की मंजूरी का इंतजार (Awaiting Railway Board approval): प्रस्ताव मेज पर है (Awaiting Railway Board approval: Proposal on the table)
दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान इस रूट पर वंदे भारत सेवा शुरू करने की योजना की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद, रेल मंत्रालय ने विभाग से एक औपचारिक प्रस्ताव (Formal Proposal) मांगा था। महत्वपूर्ण जानकारी: SWR ने लगभग 20 दिन पहले ही विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को सौंप दिया है। वर्तमान में बोर्ड के अधिकारी इस रूट की व्यवहार्यता और समय सारणी पर चर्चा कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस रूट पर नियमित सेवा संचालित करने के लिए कम से कम दो ‘ट्रेनसेट’ (रैक) की आवश्यकता होगी। चूंकि वंदे भारत ट्रेनों की मांग देश भर में बहुत अधिक है, इसलिए जैसे ही दो नए रैक उपलब्ध होंगे, इस सेवा को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया जाएगा।

AEB सिस्टम और ट्रायल रन: सुरक्षा सर्वोपरि
बेंगलुरु-मंगलुरु रूट अपनी भौगोलिक चुनौतियों, विशेष रूप से ‘सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड’ घाट सेक्शन के लिए जाना जाता है। इस कठिन रास्ते पर ट्रेन चलाने के लिए विशेष सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है। SWR के अनुसार, लॉन्च से पहले इस रूट पर व्यापक ट्रायल रन (Trial Run) आयोजित किए जाएंगे। इन ट्रायल्स की सबसे बड़ी खासियत यह होगी:
- ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सिस्टम: इस रूट पर चलने वाली वंदे भारत रैक को AEB सिस्टम से लैस किया जाएगा। यह तकनीक ढलान वाले और घुमावदार घाट सेक्शन में ट्रेन को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है।
- दो रैक का परीक्षण: ट्रायल के दौरान दो अलग-अलग वंदे भारत रैक का उपयोग किया जाएगा ताकि उनकी तकनीकी क्षमता को परखा जा सके।
- अंतिम टाइमटेबल: ट्रायल रन से प्राप्त डेटा के आधार पर ही ट्रेन के प्रस्थान और आगमन का अंतिम समय तय किया जाएगा।
विद्युतीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर: अंतिम चरण में काम
वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड ट्रेन चलाने के लिए ट्रैक का पूरी तरह विद्युतीकृत (Electrified) होना अनिवार्य है। इस दिशा में एक बड़ी बाधा हासन-ठोकुर (मंगलुरु) सेक्शन था, जिसका विद्युतीकरण कार्य हाल ही में पूरा किया गया है। हालांकि, ट्रेन चलाने से पहले ओवरहेड इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (OHE) सिस्टम का निरीक्षण और प्रमाणन (Certification) होना बाकी है। एक बार जब OHE सिस्टम को चालू करने की अनुमति मिल जाएगी, तो ट्रायल रन का रास्ता साफ हो जाएगा।
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यात्रियों को क्या होगा फायदा? (What will be the benefit to the passengers?)
वर्तमान में, बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें घाट सेक्शन की चुनौतियों के कारण काफी समय लेती हैं। वंदे भारत के आने से:
- यात्रा के समय में 1 से 1.5 घंटे की बचत होने की उम्मीद है।
- पर्यटकों को पश्चिमी घाट की प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए ‘विस्टाडोम’ जैसा अनुभव मिलेगा।
- बिजनेस और वीकेंड यात्रियों के लिए एक आरामदायक और तेज़ विकल्प उपलब्ध होगा।



