सावधान! मासूम ने निगल लिया पूरा ‘Hulk’, एक्स-रे देख डॉक्टरों के उड़े होश; अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुआ चमत्कार

अहमदाबाद में डेढ़ साल के बच्चे ने खेल-खेल में प्लास्टिक का 'हल्क' खिलौना निगल लिया। डॉक्टरों ने बिना ओपन सर्जरी, एंडोस्कोपी के जरिए 45 मिनट में कैसे बचाई जान? पढ़ें पूरी खबर और पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाह।

Child Swallowed Toy: छोटे बच्चों की चंचलता कभी-कभी बड़े हादसों का सबब बन जाती है। गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad, Gujarat) से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मात्र डेढ़ साल के एक मासूम ने खेल-खेल में प्लास्टिक का ‘हल्क’ (Hulk) खिलौना निगल लिया। यह मामला न केवल डॉक्टरों के लिए चुनौती था, बल्कि माता-पिता के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। अहमदाबाद (Ahmedabad) के सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से 45 मिनट के भीतर बच्चे के पेट से उस खिलौने को बाहर निकाल कर उसे नया जीवन दिया है।

एक्स-रे रिपोर्ट देख दंग रह गए डॉक्टर: पेट में कैद था ‘हल्क’

घटना 18 जनवरी की है, जब ‘वंश’ नाम का मासूम अपने घर में खिलौनों के साथ खेल रहा था। अचानक खेलते-खेलते उसने पूरा का पूरा प्लास्टिक का हल्क निगल लिया। कुछ ही देर बाद वंश के चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे और उसे लगातार उल्टियां होने लगीं। बच्चे की मां, भाविकाबेन ने जब खिलौनों की जांच की, तो उन्हें एक बड़ा हल्क गायब मिला। शक होने पर परिवार तुरंत बच्चे को लेकर अहमदाबाद (Ahmedabad) के सिविल अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने जब बच्चे का एक्स-रे किया, तो वह खुद भी हैरान रह गए। एक्स-रे फिल्म में बच्चे के पेट के अंदर हाथ-पैर और सिर वाला पूरा हल्क कैरेक्टर साफ नजर आ रहा था। खिलौना इतना बड़ा था कि वह किसी भी समय बच्चे की आंतों को फाड़ सकता था, जो जानलेवा साबित हो सकता था।

Child Swallowed Toy
Child Swallowed Toy

45 मिनट का ‘हाई-वोल्टेज’ ऑपरेशन: बिना चीरा लगाए मिली सफलता

अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर राकेश जोशी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक टीम गठित की। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि खिलौना पेट और खाने की नली के बीच मौजूद वॉल्व में फंसा हुआ था। अगर खिलौने को जबरदस्ती खींचा जाता, तो वॉल्व हमेशा के लिए डैमेज हो सकता था। 19 जनवरी को डॉक्टरों ने ओपन सर्जरी के बजाय एंडोस्कोपी (Endoscopy) का रास्ता चुना। डॉक्टर जोशी के अनुसार, “पेट में हवा होने के कारण प्लास्टिक का खिलौना बार-बार फिसल रहा था। खिलौने के नुकीले हाथ और पैर वॉल्व को नुकसान पहुंचा सकते थे।” डॉक्टर राकेश जोशी, डॉक्टर स्वेता और एनेस्थीसिया टीम ने करीब 45 मिनट तक कड़ी मशक्कत की। बेहद सावधानी से खिलौने के एक सिरे को पकड़कर वॉल्व के रास्ते उसे बाहर निकाला गया। यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और वंश अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है।

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पेरेंट्स के लिए ‘अलार्म’: छोटी सी चूक और जा सकती है जान

इस घटना के बाद डॉक्टर राकेश जोशी ने सभी अभिभावकों के लिए एक जरूरी सलाह जारी की है। उन्होंने कहा कि अक्सर माता-पिता छोटे बच्चों को खिलौने देकर अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए रखें इन बातों का ध्यान:

  • खिलौने का साइज: छोटे बच्चों को कभी भी ऐसे खिलौने न दें जो उनके मुंह में समा सकें।
  • निगरानी है जरूरी: बच्चा जब भी खेल रहा हो, एक वयस्क का उसके पास होना अनिवार्य है।
  • नुकीले खिलौनों से परहेज: हमेशा ‘एज-अप्रोप्रियेट’ (उम्र के अनुसार) खिलौने ही खरीदें।
  • लक्षणों को पहचानें: अगर बच्चा अचानक रोने लगे, उसे सांस लेने में दिक्कत हो या उल्टी आए, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

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