मोदी के विरोध में उतरे चारो शंकराचार्य मोदी पर जमकर निकाली भड़ास
22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है. लगभग 500 वर्षों के अथक प्रयास बाद राम लला मंदिर का निर्माण हुआ और अब उद्घाटन होने जा रहा है. इस समारोह को लेकर देश भर में जहां भारी उत्साह है वहीं रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में चारों शंकराचार्य के नहीं शामिल होने के खबर से नया विवाद खड़ा हो गया हैं.

22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है. लगभग 500 वर्षों के अथक प्रयास बाद राम लला मंदिर का निर्माण हुआ और अब उद्घाटन होने जा रहा है. इस समारोह को लेकर देश भर में जहां भारी उत्साह है वहीं रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में चारों शंकराचार्य के नहीं शामिल होने के खबर से नया विवाद खड़ा हो गया हैं.
दरअसल,प्राण प्रतिष्ठा के तरीके, यजमान किसे होना चाहिए और किस नहीं, मंदिर के अधूरे निर्माण आदि को लेकर संत समाज खुद मुद्दा बन गया है.हैरानी की बात यह है कि चारों शंकराचार्यों ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की रूप रेखा पर सवाल खड़े करते हुए इससे दूरी बना ली है। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के बाद द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीधे तौर पर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का विरोध किया है। इसके अलावा दो शंकराचार्यों ने भी बयान देकर कार्यक्रम में जाने से सीधे तौर पर मना कर दिया है। बता दे जगन्नाथ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राम लला की मूर्ति के स्पर्श से ही दिक्कत है. वे यहां तक कह गए कि ‘प्रधानमंत्री वहां प्राण प्रतिष्ठा करेंगे, मूर्ति को अपने हाथों से स्पर्श करेंगे तो क्या मैं देखूंगा ताली बजाऊंगा?’वही शारदा पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने भी प्राण प्रतिष्ठा के तौर तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राम मंदिर का नहीं, बल्कि वोटों का है। उन्होंने कहा कि पौष के अशुभ महीने में प्राण प्रतिष्ठा का कोई कारण नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि यह सीधे तौर पर बीजेपी के राजनीतिक हित को साधने वाला कार्यक्रम है।
गौरतलब है कि हिन्दू महासभा उत्तर प्रदेश ने भी एक वीडियो शेयर किया है। यह वीडियो श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी भारती तीर्थ का बताया गया है। वीडियो में दावा किया गया है रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शंकराचार्य नहीं जाएंगे। इसमें कहा गया है कि हिन्दू समुदाय को बेवकूफ बनाने और लोकसभा चुनाव से पहले प्रोपेगंडा खड़ा करने के लिए यह बीजेपी का प्रयोजित कार्यक्रम है।



