रीवा(Rewa) के जनेह थाना में अवैध शराब माफियाओं का बोलबाला,पुलिस मौन!
रीवा(Rewa) के त्योंथर में बरौली समूह की शराब दुकान की मनमानी का खुलासा। ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़ी अवैध शराब की पेटियां, पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत के लग रहे आरोप। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
विंध्य की धरती पर सफेद शेर तो मशहूर हैं, लेकिन इन दिनों रीवा(Rewa) का त्योंथर(Teonthar) इलाका एक काले कारोबार के लिए सुर्खियों में है। जनेह थाना क्षेत्र और गढ़ी चौकी के अंतर्गत आने वाले गांवों में इन दिनों ‘बरौली समूह’ की शराब दुकान की ऐसी मनमानी चल रही है कि आम जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गई है। मामला सिर्फ शराब की बिक्री का नहीं, बल्कि गांव-गांव में जहर परोसने वाली उस ‘पैकारी’ (Illegal Delivery) का है, जिसने युवाओं का भविष्य अंधेरे में झोंक दिया है।
आधी रात का वो सस्पेंस: जब ग्रामीणों ने बिछाया जाल
कहते हैं कि पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर भरता है। बरौली समूह की गढ़ी कंपोजिट शराब दुकान के ठेकेदार को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि भोथीं गांव के ग्रामीण अब जाग चुके हैं। पिछले कई दिनों से शिकायतें मिल रही थीं कि मोटरसाइकिल सवार कुछ ‘खास’ लोग बोरियों और पेटियों में भरकर गांव के कोने-कोने तक अवैध शराब पहुंचा रहे हैं।
बीती रात जैसे ही ठेकेदार के गुर्गे शराब की खेप लेकर भोथीं गांव की सीमा में घुसे, ग्रामीणों की पैनी नजर उन पर पड़ गई। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए घेराबंदी शुरू की। खुद को घिरता देख पैकारों के हाथ-पांव फूल गए। सस्पेंस और डर ऐसा था कि वे शराब से भरी पेटियां और अपनी गाड़ियाँ वहीं छोड़कर रफूचक्कर हो गए। ग्रामीणों की इस हिम्मत ने उस सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है जो अब तक सिस्टम की नाक के नीचे फल-फूल रहा था।

आबकारी विभाग की ‘चुप्पी’ और ठेकेदार की ‘जुगलबंदी’: बड़ा सवाल?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात आबकारी विभाग की भूमिका है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि अवैध शराब पैकारी रीवा में बिना विभाग की “हरी झंडी” के संभव नहीं है। क्या यह संभव है कि विधानसभा क्षेत्र में गांव-गांव शराब की नदियां बहें और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक न लगे?
ग्रामीणों का कहना है कि आबकारी विभाग और शराब ठेकेदार के बीच ऐसी ‘जुगलबंदी’ है कि शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती। उलटा, शिकायतकर्ताओं को ही डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। गढ़ी चौकी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शराब तो जब्त कर ली और कार्यवाही का आश्वासन भी दिया है, लेकिन क्या यह कार्यवाही सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
बर्बाद होता बचपन और युवाओं का भविष्य: कलेक्टर से गुहार
त्योंथर(Teonthar) के गांवों में शराब की इस अवैध पैकारी ने सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है। घर-घर शराब पहुँचने से न केवल घरेलू हिंसा बढ़ रही है, बल्कि स्कूल जाने वाले युवा भी नशे के गर्त में समाते जा रहे हैं। भोथीं और आसपास के गांवों के बुजुर्गों की आंखों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डर साफ देखा जा सकता है।
अब इस मामले में ग्रामीणों ने सीधे रीवा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP Rewa) से दखल देने की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर बरौली समूह की इस मनमानी और अवैध पैकारी पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



