UP Budget: ‘कागजी शेर’ या ‘विकास का अमृत’? शिवपाल-केशव की जुबानी जंग में ‘साइकिल’ और ‘गड्ढे’ हुए ट्रेंड
यूपी बजट पेश होते ही सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग। शिवपाल यादव ने बजट को बताया 'कागजी' तो केशव प्रसाद मौर्य ने कहा 'हमेशा के लिए पंचर हो गई साइकिल'। पढ़ें चाचा-भतीजे और डबल इंजन सरकार के बीच की तीखी तकरार।
UP Budget 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बजट का दिन सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सियासी तीरों की बौछार का दिन भी साबित हुआ। योगी सरकार के भारी-भरकम बजट के बाद सोशल मीडिया पर ‘साइकिल’ और ‘कमल’ के बीच आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को अपने दूसरे कार्यकाल का दसवां बजट पेश किया। 9.13 लाख करोड़ रुपये के इस ऐतिहासिक बजट ने जहां एक तरफ विकास के नए दावों की नींव रखी, वहीं दूसरी तरफ इसने राज्य के सियासी तापमान को भी चरम पर पहुंचा दिया है। सदन के भीतर और बाहर, पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प मुकाबला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर देखने को मिला, जहां समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच शब्दों के तीखे बाण चले। इस डिजिटल युद्ध में बेरोजगारी, सड़कें, गड्ढे और ‘पंचर साइकिल’ जैसे मुहावरों का जमकर इस्तेमाल हुआ। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर कैसे यूपी का बजट सोशल मीडिया पर एक सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया।
शिवपाल का तंज: ‘कागजी बजट’ और ‘सपनों का अमृत’
योगी सरकार द्वारा बजट पेश किए जाने के तुरंत बाद, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने मोर्चा संभाला। उन्होंने बजट को जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए इसे आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया। शिवपाल ने अपने शायराना और व्यंग्यात्मक अंदाज में सरकार को घेरते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी, जो तुरंत वायरल हो गई। शिवपाल यादव ने बजट को “सपनों का अमृत” करार दिया। उनके अनुसार, यह बजट जनता को सिर्फ सुनहरे सपने दिखाने वाला है, जबकि हकीकत कोसों दूर है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा: “उत्तर प्रदेश का ‘कागजी’ बजट मुबारक हो! यूपी की जनता को एक बार फिर ‘सपनों का अमृत’ पिलाया गया है। विकास केवल विज्ञापनों में दौड़ रहा है और हकीकत की सड़कों पर गड्ढे आज भी अपनी गिनती का इंतजार कर रहे हैं।” बेरोजगारी और महंगाई पर प्रहार शिवपाल का हमला सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं था। उन्होंने प्रदेश के युवाओं की दुखती रग ‘बेरोजगारी’ पर भी हाथ रखा। उन्होंने लिखा कि बेरोजगारों की डिग्रियां अलमारियों में धूल फांक रही हैं, जबकि सरकार का डेटा फाइलों में मुस्कुरा रहा है। उन्होंने इसे कमाल की जादूगरी बताते हुए कहा कि आंकड़ों का अंबार तो है, लेकिन गरीब की थाली में अब भी हाहाकार है। शिवपाल ने सरकार के ‘आत्मनिर्भर’ भारत के नारे पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, “नौकरी मांगो तो कहते हैं- ‘तुम आत्मनिर्भर क्यों नहीं रहे?’ महंगाई के पंख लगे हैं, छू रहे हैं आसमान, पर सरकार कह रही- ‘सब चंगा, खुश है किसान!'” शिवपाल ने इस बजट को बजट नहीं, बल्कि एक और ‘इवेंट’ की तैयारी बताया।

केशव का पलटवार: ‘पंचर साइकिल’ और ‘खिसियानी बिल्ली’
शिवपाल यादव के इन तीखे हमलों का जवाब देने में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जरा भी देर नहीं लगाई। केशव मौर्य, जो अक्सर सपा नेतृत्व पर हमलावर रहते हैं, ने शिवपाल और अखिलेश यादव की जोड़ी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने बजट के बचाव में कम और सपा के हमले में ज्यादा शब्द खर्च किए। केशव प्रसाद मौर्य ने शिवपाल के ‘कागजी बजट’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए लिखा कि योगी सरकार का बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ वाला दमदार बजट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा: “सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव और उनके चाचा श्री शिवपाल यादव की साइकिल इस दमदार बजट से हमेशा के लिए पंचर हो गई है। चाचा-भतीजा की हल्की बयानबाजी बेवजह अपना मजाक उड़वा रही है।” 2047 तक सत्ता से वनवास की भविष्यवाणी केशव मौर्य यहीं नहीं रुके। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया। अपनी पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि सपा के लिए न केवल 2027, बल्कि 2047 तक सत्ता के दरवाजे बंद दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी हताशा के कारण चाचा-भतीजे में बेचैनी है। केशव ने सपा नेताओं पर प्रसिद्ध मुहावरा “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” का प्रयोग करते हुए कहा कि यूपी की जनता समझदार है और वह इन बयानों का जवाब देना जानती है। भाजपा का मानना है कि 9.13 लाख करोड़ का यह बजट प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे विपक्ष घबराया हुआ है।
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‘डबल इंजन’ बनाम ‘गड्ढे में विकास’: जुबानी जंग का दूसरा दौर
केशव प्रसाद मौर्य के जवाब ने आग में घी का काम किया। शिवपाल यादव ने केशव की ‘पंचर साइकिल’ वाली टिप्पणी का करारा जवाब देने के लिए फिर से सोशल मीडिया का सहारा लिया। इस बार उनका निशाना केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार की विफलताएं थीं। शिवपाल ने केशव की पोस्ट के जवाब में सवालिया लहजे में पूछा कि आखिर सरकार का विकास कहां है? उन्होंने एक बार फिर सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाया, जो आम जनता से सीधा जुड़ा हुआ है। शिवपाल ने लिखा: “यूपी की जनता पूछ रही है- आपकी ‘डबल इंजन’ सरकार का विकास आखिर किस गड्ढे में फंस गया है?” यह सवाल सीधा भाजपा के उस दावे पर चोट थी जिसमें वे डबल इंजन (केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार) से तेज विकास की बात करते हैं। शिवपाल ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बजट के भारी-भरकम आंकड़े उन गड्ढों को नहीं भर पा रहे हैं, जिनसे जनता रोज जूझ रही है।



