सिगरेट का एक कश और सैलरी ‘धुआं’! 1 फरवरी से लागू हुआ नया टैक्स सिस्टम, जानें अब कितने में मिलेगी एक स्टिक?

क्या वाकई 72 रुपये की होगी एक सिगरेट? 1 फरवरी 2026 से लागू हुए नए टैक्स स्लैब, एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस का गणित समझें। जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा बोझ।

Cigarette Price Hike 2026: भारत में सिगरेट और तंबाकू प्रेमियों के लिए 1 फरवरी 2026 की सुबह किसी झटके से कम नहीं रही। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि जो सिगरेट कल तक 18 रुपये की थी, वह अब 70-72 रुपये की मिलेगी। हालांकि, क्या वाकई दाम इतने बढ़ेंगे या यह केवल एक अफवाह है? बजट 2026 और उससे पहले पारित हुए विधेयकों ने तंबाकू उत्पादों की पूरी इकोनॉमी बदल दी है। आइए समझते हैं कि आपकी जेब पर इसका कितना और कैसा असर पड़ने वाला है।

सोशल मीडिया का ’72 रुपये वाला गणित’ बनाम हकीकत

जैसे ही संसद में सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 की चर्चा शुरू हुई, इंटरनेट पर Cigarette Price Hike 2026 को लेकर अटकलें तेज हो गईं। ‘सोशल मीडिया गणितज्ञों’ का दावा है कि सिगरेट की कीमतें 300% तक बढ़ सकती हैं। लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि 72 रुपये प्रति स्टिक की बात थोड़ी अतिशयोक्ति (Exaggeration) हो सकती है। असल में, टैक्स का बोझ बढ़ा जरूर है, लेकिन यह वृद्धि सिगरेट की लंबाई और श्रेणी के आधार पर तय की गई है। यानी, हर सिगरेट का दाम एक समान नहीं बढ़ेगा, बल्कि आपके ब्रांड और उसकी लंबाई पर निर्भर करेगा कि आपका बजट कितना बिगड़ेगा।

Cigarette Price Hike 2026
Cigarette Price Hike 2026

लंबाई के हिसाब से लगेगा टैक्स: समझिए नया ‘एक्साइज गणित’

2017 में GST लागू होने के बाद से सिगरेट पर कोई बड़ा टैक्स बदलाव नहीं हुआ था। अब तक इस पर 28% GST और कंपंसेशन सेस लगता था। लेकिन 1 फरवरी से खेल बदल गया है। अब सिगरेट पर Cigarette Price Hike 2026 के तहत प्रति स्टिक के हिसाब से अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी:

  • 65 मिमी तक (बिना फिल्टर): लगभग ₹2.05 प्रति स्टिक का अतिरिक्त भार।
  • 65 मिमी तक (फिल्टर वाली): लगभग ₹2.10 प्रति स्टिक अतिरिक्त।
  • 65-70 मिमी सिगरेट: ₹3.60 से ₹4 प्रति स्टिक का इजाफा।
  • 70-75 मिमी (प्रीमियम): करीब ₹5.40 प्रति स्टिक की बढ़ोतरी।
  • स्पेशल डिजाइन सिगरेट: यहां सबसे ज्यादा ₹8.50 प्रति स्टिक तक टैक्स लग सकता है।

कुल मिलाकर, सिगरेट पर टैक्स का बोझ जो पहले 50-55% था, वह अब बढ़कर 60 से 70% तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे 18 रुपये वाली सिगरेट 25 से 30 रुपये के बीच सेटल हो सकती है।

पान मसाला और गुटखा पर भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

सिर्फ सिगरेट ही नहीं, चबाने वाले तंबाकू और पान मसाला के शौकीनों की भी खैर नहीं है। सरकार ने अब इनके लिए MRP आधारित टैक्स सिस्टम लागू कर दिया है। इसका मतलब है कि अब टैक्स फैक्ट्री लागत पर नहीं, बल्कि पैकेट पर छपी कीमत पर लगेगा।

  • गुटखा: इस पर कुल एक्साइज ड्यूटी अब 91% तक पहुंच सकती है।
  • जर्दा और खैनी: चबाने वाले तंबाकू पर करीब 82% एक्साइज ड्यूटी का प्रावधान है।
  • हेल्थ सेस: पान मसाला पर अब अतिरिक्त हेल्थ सेस और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस भी लगेगा, जिससे कुल टैक्स 88% के आसपास रहेगा।

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क्या यह सिर्फ राजस्व बढ़ाना है या सेहत की चिंता?

सरकार का यह कदम दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ जहां ‘सिन गुड्स’ (Sin Goods) पर टैक्स बढ़ाकर सरकारी खजाना भरने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर तंबाकू उत्पादों को इतना महंगा कर देना है कि लोग इसे छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे अवैध तंबाकू व्यापार (Smuggling) को बढ़ावा मिल सकता है, जिस पर सरकार को सख्त नजर रखनी होगी।

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