5 साल की उम्र में मां को खोया, ट्रक ड्राइवर पिता ने पाला; अब 23 की उम्र में थम गई ‘प्रेम बाईसा’ की मधुर वाणी
मात्र 23 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गईं राजस्थान की मशहूर कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा। संघर्ष, वैराग्य और भक्ति से भरी उनकी अनसुनी जीवन गाथा यहाँ पढ़ें।

Sadhvi Prem Baisa Biography: राजस्थान (Rajasthan) की आध्यात्मिक धरा ने कई संतों को जन्म दिया है, लेकिन कुछ कहानियां दिल को झकझोर कर रख देती हैं। जोधपुर (Jodhpur) की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (Prem Baisa) का महज 23 वर्ष की आयु में निधन न केवल उनके भक्तों के लिए एक बड़ा आघात है, बल्कि उनके जीवन का सफर भी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं था। एक ट्रक ड्राइवर की बेटी से लेकर लाखों श्रद्धालुओं की ‘बाईसा’ बनने तक का सफर संघर्ष, त्याग और भक्ति की अनूठी मिसाल है।
मां का साया छिनने के बाद आश्रम बना ‘प्रेम’ का बसेरा
साध्वी प्रेम बाईसा ( Prem Baisa) का जन्म बालोतरा (Balotra) जिले के परेऊ गांव में हुआ था। जब वे केवल 5 साल की थीं, तभी उनकी माता अमरू बाईसा का देहांत हो गया। उनके पिता वीरमनाथ, जो पेशे से एक ट्रक ड्राइवर थे, के सामने न केवल अपनी बेटी को पालने की चुनौती थी, बल्कि समाज और परिवार के दबावों से निपटने का भी संघर्ष था। ग्रामीणों की मानें तो भक्ति का बीज प्रेम बाईसा में उनकी मां से ही आया था। एक समय ऐसा आया जब उनके माता-पिता ने ‘चौमासा व्रत’ (4 महीने का कठिन उपवास) रखने का संकल्प लिया। परिवार के विरोध के कारण वीरमनाथ अपनी मासूम बेटी को लेकर जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम आ गए। यहीं संतों के सान्निध्य में प्रेम बाईसा की परवरिश हुई और भजन-कीर्तन ही उनकी दुनिया बन गई।

12 साल की उम्र में पहली कथा और आध्यात्मिक ऊंचाइयां
आश्रम में रहते हुए प्रेम बाईसा ने संत राजाराम जी और संत कृपाराम जी महाराज से आध्यात्मिक शिक्षा ली। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद में व्यस्त होते हैं, उस 12 साल की उम्र में प्रेम बाईसा ने अपनी पहली भागवत कथा का वाचन किया। उनकी मधुर आवाज और सरल भाषा शैली ने जल्द ही उन्हें मारवाड़ क्षेत्र में लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने अपने पैतृक गांव परेऊ में आश्रम बनवाया और बाद में जोधपुर में भी अपना केंद्र स्थापित किया। देखते ही देखते वे राजस्थान की एक प्रभावशाली युवा साध्वी के रूप में उभरीं।
इसे भी पढें: “IAS ट्रेनिंग का झांसा, नीली बत्ती का सपना और 26 लाख की ठगी: कानपुर में फर्जी DM का बड़ा खुलासा”
आकस्मिक निधन और विवादों के घेरे में अंतिम विदाई
बुधवार को जोधपुर (Jodhpur) में साध्वी प्रेम बाईसा (Prem Baisa) के आकस्मिक निधन ने सबको चौंका दिया। उनकी मृत्यु के बाद स्थितियां तब तनावपूर्ण हो गईं जब जोधपुर के आरती नगर स्थित आश्रम में शव को ले जाने और मोबाइल फोन को लेकर विवाद शुरू हुआ। भक्तों ने आरोप लगाया कि उनकी मृत्यु की परिस्थितियों और उपचार की जांच होनी चाहिए। ACP (वेस्ट) छवि शर्मा के अनुसार: “परिजनों ने बताया कि साध्वी की तबीयत दो दिनों से खराब थी। कथित तौर पर एक इंजेक्शन लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।” फिलहाल पुलिस ने मोबाइल जब्त कर जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को उनके पैतृक गांव परेऊ में गमगीन माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रेम बाईसा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आध्यात्मिक यात्रा और संघर्ष की गाथा हमेशा याद की जाएगी।



