PM मोदी ने क्यों तोड़ा प्रोटोकॉल? सिर्फ 2 घंटे के लिए भारत आए UAE राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद की यात्रा क्यों है बेहद अहम

PM मोदी ने UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के लिए प्रोटोकॉल क्यों तोड़ा? जानिए 2 घंटे के दिल्ली दौरे का रणनीतिक, कूटनीतिक और वैश्विक महत्व।

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए खुद एयरपोर्ट जाना कोई सामान्य बात नहीं है। लेकिन सोमवार, 19 जनवरी को जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान दिल्ली पहुंचे, तो पीएम मोदी ने तय कूटनीतिक प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए खुद उनकी अगवानी की। सिर्फ दो घंटे के इस संक्षिप्त दौरे ने भारत-यूएई संबंधों को लेकर वैश्विक स्तर पर कई संदेश दे दिए।

कौन हैं शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान?

शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, जिन्हें MBZ के नाम से भी जाना जाता है, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक हैं। उन्हें आधुनिक यूएई का रणनीतिक वास्तुकार माना जाता है। रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक कूटनीति में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। भारत के साथ उनके रिश्ते केवल औपचारिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत भरोसे पर आधारित हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी तीसरी भारत यात्रा थी, जबकि पिछले दस वर्षों में वे पांच बार भारत आ चुके हैं, जो दोनों देशों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

PM Modi
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PM मोदी ने प्रोटोकॉल क्यों तोड़ा?

प्रधानमंत्री मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत करना महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक सशक्त कूटनीतिक संदेश था। दोनों नेताओं का एक-दूसरे को गले लगाना, एक ही कार में बैठकर रवाना होना और साथ झूला झूलना – ये सब भारत-यूएई के रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वे अपने “भाई” शेख मोहम्मद का स्वागत करने गए। यह व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती और रणनीतिक साझेदारी की गंभीरता को दिखाता है।

सिर्फ 2 घंटे का दौरा, फिर भी क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

हालांकि यह दौरा केवल करीब दो घंटे का था, लेकिन इसकी टाइमिंग और एजेंडा इसे बेहद अहम बनाते हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब

  • ईरान संकट गहराता जा रहा है।
  • गाजा पीस प्लान पर वैश्विक चर्चाएं तेज हैं।
  • मध्य-पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और UAE राष्ट्रपति के बीच बातचीत में

  • व्यापार और निवेश
  • रक्षा उद्योग में सहयोग
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात
    जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

भारत-यूएई रिश्तों की मजबूत नींव

भारत और यूएई के रिश्ते आज सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं।

  • CEPA समझौता
  • स्थानीय मुद्रा में लेन-देन
  • रक्षा और सैन्य सहयोग
  • सांस्कृतिक और प्रवासी संबंध

इन सभी ने द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाई दी है। यूएई भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।

रक्षा सहयोग भी बना चर्चा का विषय

इस यात्रा से पहले 4 जनवरी को भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी यूएई के दौरे पर गए थे। यह दिखाता है कि भारत और यूएई सैन्य और रक्षा सहयोग को भी नई दिशा दे रहे हैं। नागरिक और सैन्य दोनों स्तरों पर साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

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वैश्विक राजनीति में भारत-यूएई की साझा भूमिका

दोनों देशों के नेता न केवल द्विपक्षीय बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी एक-दूसरे से समन्वय बढ़ा रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर शांति प्रयासों तक, भारत-यूएई साझेदारी अब वैश्विक मंच पर भी असर डाल रही है।

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