‘मुझे बचा लो, मैंने जहर खा लिया है’: कोटा में NEET की छात्रा ने दी जान, सुसाइड से पहले की चीखें सुन कांप जाएगा कलेजा
कोटा में NEET की तैयारी कर रही छात्रा जूही पटेल ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। मरने से पहले उसके आखिरी शब्द थे "मुझे बचा लो"। पढ़ें कोटा सुसाइड मामले की पूरी खबर।
Kota Student Suicide Case: राजस्थान का कोटा, जिसे ‘शिक्षा की काशी’ कहा जाता है, अब धीरे-धीरे छात्रों के लिए एक खौफनाक जगह बनता जा रहा है। मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए मशहूर इस शहर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उसके संघर्ष और उसकी आखिरी गुहार ने प्रशासन और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है।
मध्य प्रदेश की जूही पटेल ने कोटा में तोड़ा दम
मृतक छात्रा की पहचान मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की रहने वाली जूही पटेल के रूप में हुई है। जूही पिछले कुछ समय से कोटा के दादाबाड़ी इलाके में रहकर नीट की ऑनलाइन तैयारी कर रही थी। जानकारी के अनुसार, घटना गुरुवार देर रात की है जब जूही ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। जहर खाने के कुछ देर बाद जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने पास के कमरे में रह रहे अपने चचेरे भाई-बहन को आवाज दी और कहा, “मैंने जहर खा लिया है, मुझे बचा लो।” यह सुनते ही अफरा-तफरी मच गई। मकान मालिक और अन्य छात्रों की मदद से उसे तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन कोचिंग का सहारा ले रही थी छात्रा
परिजनों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जूही पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर थी। उसने पिछले साल कोटा में रहकर ऑफलाइन कोचिंग की थी। करीब तीन महीने पहले वह दोबारा अपनी मर्जी से कोटा आई थी ताकि शांति से सेल्फ स्टडी कर सके। उसने ऑनलाइन टेस्ट सीरीज ज्वाइन कर रखी थी और अपने स्तर पर परीक्षा की तैयारी में जुटी थी। छात्रा के भाई ने बताया कि वह अपनी इच्छा से कोटा रहने आई थी और पढ़ाई का दबाव उस पर साफ दिखता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर वह क्या वजह थी जिसने जूही को इतना आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। क्या वह किसी टेस्ट के स्कोर से परेशान थी या फिर अकेलेपन और प्रतियोगिता के दबाव ने उसे तोड़ दिया था?
कोटा में बढ़ता सुसाइड ग्राफ: एक गंभीर चिंता का विषय
कोटा में छात्रों के सुसाइड के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर साल हजारों छात्र अपने सपनों को साकार करने के लिए यहाँ आते हैं, लेकिन गलाकाट प्रतिस्पर्धा और उम्मीदों का बोझ कई बार उन पर भारी पड़ जाता है। Kota Student Suicide Case की फेहरिस्त में जूही का नाम जुड़ना प्रशासन की विफलता पर भी सवाल उठाता है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें ‘संडे नो टेस्ट’, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और हॉस्टलों में ‘एंटी-हैंगिंग डिवाइस’ जैसे उपाय शामिल हैं। इसके बावजूद, छात्रों के बीच बढ़ता डिप्रेशन एक साइलेंट किलर साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भौतिक सुरक्षा उपाय काफी नहीं हैं; छात्रों को भावनात्मक समर्थन और एक ऐसा माहौल देने की जरूरत है जहां वे असफल होने से न डरें।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
दादाबाड़ी थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को मोर्चरी में रखवाया। शुक्रवार को जब परिजन छतरपुर से कोटा पहुंचे, तो उनके सामने शव का पोस्टमार्टम किया गया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और छात्रा के कमरे की तलाशी ली जा रही है ताकि किसी सुसाइड नोट या अन्य सुराग का पता लगाया जा सके।
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अभिभावकों के लिए संदेश
इस दुखद घटना ने एक बार फिर सभी माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यदि आपका बच्चा बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा है, तो उससे नियमित बात करें। उसे यह भरोसा दिलाएं कि उसकी जान किसी भी परीक्षा या परिणाम से कहीं अधिक कीमती है।



