D ने ममता बनर्जी के खिलाफ CBI FIR की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया, I-PAC रेड विवाद से सियासी भूचाल

ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ CBI जांच की मांग की है। I-PAC रेड विवाद, कोयला तस्करी और PMLA के तहत कार्रवाई से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें।

Mamata Banerjee CBI FIR: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग की है। मामला राजनीतिक रणनीतिकार संस्था Indian PAC Consulting Pvt Ltd (I-PAC) और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई ED की छापेमारी से जुड़ा है।

Mamata Banerjee CBI FIR
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ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली। एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री ने वहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटाए, जो मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े थे।

ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये दस्तावेज तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े राजनीतिक डेटा थे और केंद्रीय एजेंसियां चुनाव से पहले जानबूझकर पार्टी को निशाना बना रही हैं।

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कोयला तस्करी केस और I-PAC का कथित हवाला कनेक्शन

ED के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई कोयला तस्करी मामले की जांच का हिस्सा है, जो वर्ष 2020 में व्यवसायी अनुप माजी के खिलाफ दर्ज किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि अनुप माजी के नेतृत्व में एक संगठित सिंडिकेट पश्चिम बंगाल में ECL (Eastern Coalfields Limited) की जमीन से अवैध रूप से कोयला निकालकर बेच रहा था।

ED का दावा है कि इस अवैध कोयले का बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनियों को बेचा गया। जांच में यह भी सामने आया कि इस कोयला तस्करी के पैसों को हवाला नेटवर्क के जरिए घुमाया गया।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि इस हवाला नेटवर्क से जुड़े एक ऑपरेटर ने I-PAC को करोड़ों रुपये के लेन-देन में मदद की। इसी कड़ी में I-PAC के परिसरों पर छापेमारी की गई थी।

Mamata Banerjee CBI FIR
Mamata Banerjee CBI FIR

ED ने ममता बनर्जी के खिलाफ CBI FIR की मांग की, क्योंकि एजेंसी का मानना है कि राज्य पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व के रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

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ED बनाम TMC – हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं, फैसला अहम

इस पूरे मामले में अब कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष तीन अलग-अलग याचिकाएं लंबित हैं-

  1. ED की याचिका – ममता बनर्जी और राज्य पुलिस पर जांच में बाधा डालने का आरोप, CBI से FIR दर्ज कराने की मांग।
  2. TMC की याचिका – पार्टी से जुड़े दस्तावेजों और डेटा के दुरुपयोग या लीक होने से सुरक्षा की मांग।
  3. प्रतीक जैन की याचिका – छापेमारी प्रक्रिया से जुड़े कानूनी पहलुओं को चुनौती।

ED ने अपनी याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा PMLA, 2002 के तहत चल रही जांच में हस्तक्षेप कानून के शासन पर सीधा हमला है।

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एजेंसी का यह भी आरोप है कि उसके अधिकारियों को गलत तरीके से रोका गया, बाहर निकलने से रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। ED का कहना है कि जब राज्य की मशीनरी ही जांच में बाधा बने, तब केवल CBI जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही निष्पक्ष जांच कर सकती है।

राजनीतिक मायने और आगे की राह

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की चर्चा तेज है। TMC इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि ED का कहना है कि जांच का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।

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अब सबकी निगाहें जस्टिस सुव्रत घोष पर टिकी हैं, जो इस मामले की सुनवाई करेंगे। हाईकोर्ट का फैसला न केवल इस केस की दिशा तय करेगा, बल्कि केंद्र बनाम राज्य की राजनीति को भी नया मोड़ दे सकता है।

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