Rewa के सेमरिया में आधी रात फायरिंग: FIR के 10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, पीड़ितों में दहशत
रीवा(Rewa) के सेमरिया(Semariya) थाना क्षेत्र के ग्राम मऊ में आधी रात फायरिंग और कातिलाना हमले के बावजूद FIR के 10 दिन बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं। पीड़ितों ने थाना प्रभारी पर लगाए गंभीर आरोप।

मध्यप्रदेश के रीवा(Rewa) के सेमरिया(Semariya) थाना क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। ग्राम मऊ में 8 दिसंबर की आधी रात जो कुछ हुआ, उसने न केवल गांव वालों को दहशत में डाल दिया बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के अनुसार, देर रात बदमाशों ने प्रदीप सिंह के घर को निशाना बनाया। आरोप है कि पहले दरवाजा तोड़ने की कोशिश की गई और जब दरवाजा नहीं खुला तो बदमाशों ने तीन राउंड फायरिंग कर पूरे इलाके में दहशत फैला दी। गोलियों की आवाज से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए।
ग्राम मऊ में अपराधियों का आतंक
फायरिंग के बाद भी बदमाशों का मन नहीं भरा। आरोप है कि उन्होंने डंडों और पत्थरों से कातिलाना हमला कर दिया। इस हमले में प्रदीप सिंह के कंधे में गंभीर चोट आई है और शरीर पर मारपीट के कई निशान मौजूद हैं। पीड़ित को तत्काल उपचार की आवश्यकता पड़ी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरी घटना के 10 दिन बाद भी पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने सेमरिया(Semariya) थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, सभी तथ्यों और नामजद आरोपियों की जानकारी दी, बावजूद इसके न तो गिरफ्तारी हुई और न ही कोई प्रभावी कदम उठाया गया।
धमकियों का सिलसिला जारी
इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि आरोपी अब और ज्यादा बेखौफ हो चुके हैं। पीड़ित वीरेंद्र सिंह और प्रदीप सिंह का आरोप है कि आरोपी विजय सिंह और योगेन्द्र सिंह आए दिन फोन पर गाली-गलौज करते हैं, गांव से निकालने और जान से मारने की धमकी देते हैं।
पीड़ितों के अनुसार, आरोपी खुलेआम कहते हैं कि “पुलिस हमारी जेब में है”, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं है। इस तरह की धमकियों से पूरा गांव भय के साए में जी रहा है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

पुलिस पर गंभीर आरोप
पीड़ितों ने सेमरिया(Semariya) थाना प्रभारी विकास कपीस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि थाना प्रभारी की आरोपियों से मिलीभगत के कारण ही आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। यदि पुलिस निष्पक्ष होती तो इस मामले में अब तक गिरफ्तारी हो चुकी होती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो अपराधियों के हौंसले और बुलंद होंगे और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था
यह मामला रीवा(Rewa) जिले की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब एफआईआर दर्ज होने और गंभीर अपराध सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता का पुलिस और प्रशासन से भरोसा उठना स्वाभाविक है।
अब सवाल यह है कि
क्या सेमरिया(Semariya) थाना क्षेत्र में अपराधियों को खुली छूट मिल चुकी है?
क्या पुलिस की चुप्पी किसी बड़े दबाव या मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है?
और क्या पीड़ितों को समय पर न्याय मिल पाएगा?
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।



