ईरान में विद्रोह की आग: 5000 मौतें, 24000 गिरफ्तार, खामेनेई ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
ईरान में हिंसक प्रदर्शनों में 5000 से अधिक मौतें और 24000 गिरफ्तारियां। सरकार ने आतंकवादियों और विदेशी साजिश का लगाया आरोप।
Iran Protests: ईरान में बीते हफ्तों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश को गहरे संकट में डाल दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक कम से कम 5000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें लगभग 500 सुरक्षा कर्मी भी शामिल हैं। इसके अलावा 24000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने इन घटनाओं के लिए सीधे तौर पर ‘आतंकवादियों और सशस्त्र दंगाइयों’ को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि ये आंकड़े पूरी तरह सत्यापित हैं और आगे इनमें बहुत अधिक वृद्धि की संभावना नहीं है। वहीं मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े इससे अलग तस्वीर पेश करते हैं।
आर्थिक संकट से शुरू होकर राजनीतिक विद्रोह तक पहुंचा आंदोलन
ईरान में ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे। शुरुआत में लोग महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। लेकिन महज दो हफ्तों के भीतर यह आंदोलन राजनीतिक विद्रोह में तब्दील हो गया। देश के कई शहरों में सरकार विरोधी नारे, धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग और सर्वोच्च नेतृत्व के खिलाफ खुला आक्रोश देखने को मिला। हालात इतने बिगड़ गए कि कई जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हुईं। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बाद में हथियारबंद समूहों ने हाईजैक कर लिया, जिससे हिंसा भड़क उठी।

24000 गिरफ्तारियां, मानवाधिकार संगठनों के दावे अलग
अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार संगठन के अनुसार, अब तक 3308 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 4382 मामलों की जांच अभी जारी है। संगठन का दावा है कि 24000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इन आंकड़ों को अतिरंजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि विदेशी मीडिया और मानवाधिकार समूह ईरान की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने आरोप लगाया है कि इजरायल और विदेशों में बैठे सशस्त्र संगठन प्रदर्शनकारियों को हथियार और आर्थिक सहायता दे रहे थे।
कुर्द इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा, विदेशी दखल का आरोप
ईरान के उत्तर-पश्चिमी कुर्द बहुल क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। यहां लंबे समय से कुर्द अलगाववादी समूह सक्रिय हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन्हीं इलाकों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। सूत्रों के अनुसार, इराक से सशस्त्र कुर्द समूहों ने ईरान में घुसपैठ की कोशिश की थी। नॉर्वे स्थित कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने भी पुष्टि की है कि कुर्द क्षेत्रों में झड़पें सबसे अधिक और सबसे घातक रहीं। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि विदेशी ताकतों ने हालात का फायदा उठाकर देश को अस्थिर करने की साजिश रची।
खामेनेई का अमेरिका और इजरायल पर सीधा आरोप
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों ने ईरान में अशांति फैलाने में अहम भूमिका निभाई है। खामेनेई ने स्वीकार किया कि ‘कई हजार लोग मारे गए हैं’, लेकिन उन्होंने सुरक्षा बलों की कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।
ट्रंप की चेतावनी और फांसी पर विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या या सामूहिक फांसी जारी रही, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने प्रस्तावित सामूहिक फांसी को फिलहाल टाल दिया है। वहीं ईरानी न्यायपालिका का कहना है कि फांसी की सजा अब भी दी जा सकती है।
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इंटरनेट बंद, हालात काबू में होने का दावा
सरकारी मीडिया और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुरक्षा बलों की सख्ती के बाद प्रदर्शन काफी हद तक शांत हो गए हैं। हालांकि, इंटरनेट सेवाएं बार-बार बंद की जा रही हैं, जिससे सही जानकारी मिलना मुश्किल हो रहा है। इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक, शनिवार को कुछ समय के लिए इंटरनेट बहाल किया गया था, लेकिन बाद में फिर बंद कर दिया गया।



