नोएडा सेक्टर-150 हादसा: 3000 करोड़ बकाया, सिस्टम की लापरवाही और एक इंजीनियर की मौत ने खोली प्राधिकरण-बिल्डर गठजोड़ की पोल
नोएडा सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की मौत के पीछे बिल्डर पर 3000 करोड़ बकाया, नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही और CBI-ED जांच की पूरी कहानी पढ़ें।
Noida Sector-150 Yuvraj Dath Case: नोएडा सेक्टर-150 में 27 वर्षीय होनहार इंजीनियर युवराज की मौत अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रह गई है, बल्कि यह नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर कंपनियों की गंभीर लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है। FIR में नामजद बिल्डर कंपनियों पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3000 करोड़ रुपये का बकाया बताया जा रहा है। इसके बावजूद न तो बकाया वसूला गया और न ही इलाके में बुनियादी सुरक्षा इंतजाम किए गए। युवराज की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस पूरे मामले में CBI और ED की एंट्री ने इसे और भी गंभीर बना दिया है।
3000 करोड़ बकाया और प्राधिकरण की चुप्पी: सवालों के घेरे में सिस्टम
जानकारी के मुताबिक, जिन बिल्डर कंपनियों के प्लॉट के पास यह हादसा हुआ, उन पर नोएडा प्राधिकरण का हजारों करोड़ रुपये का बकाया है। हैरानी की बात यह है कि प्राधिकरण न तो यह रकम वसूल पाया और न ही इन साइट्स पर न्यूनतम सुरक्षा मानकों को लागू कर सका। खुले नाले, पानी से भरे खाली प्लॉट, बिना बैरिकेडिंग की सड़कें और अंधेरे में गायब रिफ्लेक्टर-ये सब सेक्टर-150 की हकीकत थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्राधिकरण अपनी वित्तीय जिम्मेदारी नहीं निभा पाया, तो नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करता?

स्पोर्ट्स सिटी अलॉटमेंट से लेकर CBI-ED जांच तक
7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर जमीन अलॉट की गई थी। नियमों के मुताबिक, इस जमीन का इस्तेमाल खेलों से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए होना था। लेकिन आरोप है कि बिल्डर ने इस जमीन को अलग-अलग लोगों को बेच दिया। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बड़े स्तर पर वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है। इसी कारण अब इस पूरे प्रकरण की जांच CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही हैं। जांच एजेंसियों की एंट्री से यह साफ हो गया है कि मामला सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें गहरी आर्थिक और प्रशासनिक गड़बड़ियां शामिल हैं।
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अनसुनी शिकायतें, बेअसर पत्र और जिम्मेदारी से बचता तंत्र
सेक्टर-150 के निवासियों ने कई बार नोएडा प्राधिकरण को लिखित शिकायतें दी थीं। इनमें स्पीड ब्रेकर, स्ट्रीट लाइट, रिफ्लेक्टर, खुले नालों को ढकने और ट्रैफिक सुधार की मांग की गई थी। लोगों ने चेतावनी भी दी थी कि हालात नहीं सुधरे तो बड़ा हादसा हो सकता है। यहां तक कि दादरी विधायक तेजपाल नागर और सांसद महेश शर्मा ने भी प्राधिकरण को पत्र लिखे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। IGRS पोर्टल पर की गई शिकायतों में भी जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर डाल दी गई। नोएडा प्राधिकरण के ACEO सतीश पाल का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और एक जूनियर इंजीनियर को हटा दिया गया है, लेकिन जनता का सवाल है-क्या सिर्फ ट्रांसफर और बयानबाजी से युवराज को इंसाफ मिलेगा?



