2000 के नोटों में 400 करोड़ की रहस्यमयी लूट! कर्नाटक से महाराष्ट्र तक सियासी भूचाल, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा पर 2000 रुपये के नोटों में 400 करोड़ की कथित लूट से देश की राजनीति गरमा गई है। जानिए क्या है पूरा मामला, क्यों आमने-सामने हैं भाजपा और कांग्रेस, और जांच में क्या सामने आ सकता है।
400 Crore Cash Loot 2000 Rupee Notes Karnataka Maharashtra Politics: कर्नाटक (Karnataka) और महाराष्ट्र (Maharashtra) की सीमा पर सामने आई 2000 रुपये के नोटों में 400 करोड़ रुपये की कथित लूट ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारतीय राजनीति को भी एक बार फिर गरमा दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन चुका है। इस सनसनीखेज घटना की जानकारी तब सामने आई, जब पीड़ित संदीप पाटिल ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद से यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
कैसे हुई 400 करोड़ रुपये की कथित लूट?
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 22 अक्टूबर 2024 को कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा स्थित चोरला घाट (Chorla Ghat) में हुई थी। शिकायतकर्ता संदीप पाटिल के मुताबिक, 2000 रुपये के पुराने नोटों में भरी लगभग 400 करोड़ रुपये की नकदी दो ट्रकों के ज़रिये ले जाई जा रही थी। इसी दौरान छह हथियारबंद लोगों के गिरोह ने ट्रकों को रोका और बंदूक की नोक पर पूरी नकदी लूट ली। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी रकम की आवाजाही और लूट की जानकारी कई महीनों तक सामने नहीं आई। महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और नकदी के असली मालिक का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच समिति (SIT) का गठन किया गया है।

प्रियांक खरगे (Priyank Kharge) के सवाल और भाजपा सरकार पर निशाना
मामला सामने आने के बाद कर्नाटक (Karnataka) सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे (Priyank Kharge) ने महाराष्ट्र (Maharashtra) और केंद्र की भाजपा सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी की आवाजाही आखिर किसकी जानकारी में हो रही थी। कलबुर्गी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि यह पैसा किसका है। जांच होने दीजिए, तभी पता चलेगा कि यह कांग्रेस, भाजपा, एनसीपी या शिवसेना का है। असली सवाल यह है कि भाजपा शासित राज्यों में यह सब उनकी नाक के नीचे कैसे हो रहा है?” उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा का ज़िक्र करते हुए नकदी की आवाजाही पर संदेह जताया। साथ ही, कुछ भाजपा विधायकों द्वारा लगाए गए उस आरोप पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी के बाद 2000 रुपये के नोटों को तिरुपति ले जाकर काले धन को सफेद किया जा रहा था। प्रियांक खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के पास Gen Z और भजन क्लबों पर बोलने का समय है, लेकिन 400 करोड़ रुपये की तस्करी पर कोई जवाब नहीं है।
कांग्रेस पर भाजपा का पलटवार और पुलिस का रुख
कांग्रेस के आरोपों के जवाब में भाजपा नेता चलावादी नारायणस्वामी ने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर सीधा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कर्नाटक से पैसे भेजकर अन्य राज्यों के चुनावों में फंडिंग कर रही है। उन्होंने कहा, “तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस फंड नहीं जुटा पा रही, इसलिए कर्नाटक से पैसा भेजा जा रहा है।” भाजपा नेता ने गृह लक्ष्मी गारंटी योजना के तहत फरवरी और मार्च 2025 के भुगतान में कथित देरी का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। वहीं, बेलगावी के पुलिस अधिकारी के. रामराजन ने साफ किया कि कर्नाटक में अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उनका कहना है कि न तो कोई औपचारिक शिकायत मिली है और न ही ठोस सबूत, इसलिए सिर्फ अफवाहों के आधार पर कार्रवाई संभव नहीं है।
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आगे क्या? (What’s next?)
फिलहाल यह मामला महाराष्ट्र पुलिस की जांच के अधीन है। 400 करोड़ रुपये जैसी भारी नकदी किसकी थी, इसे कहां ले जाया जा रहा था और इसका उद्देश्य क्या था-ये सभी सवाल अभी अनुत्तरित हैं। लेकिन इतना तय है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।



