24 घंटे में दो हत्याएं: बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ता कहर, व्यापारी को पीट-पीटकर और युवक को गाड़ी से कुचला

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा। 24 घंटे में दो हिंदुओं की निर्मम हत्या ने देश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते 24 घंटों में दो अलग-अलग जिलों से सामने आई दो हत्याओं ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गाजीपुर और राजबाड़ी जिलों में हुई इन घटनाओं से न केवल स्थानीय हिंदू समुदाय में भय का माहौल है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की कानून व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं।

मामूली विवाद बना मौत की वजह, होटल व्यवसायी की बेरहमी से हत्या

ताजा मामला बांग्लादेश के गाजीपुर जिले के कालिगंज क्षेत्र से सामने आया है। शनिवार सुबह करीब 11 बजे 60 वर्षीय हिंदू होटल व्यवसायी लिटन चंद्र घोष की सरेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। लिटन घोष इलाके में बोयीशाखी स्वीट एंड होटल के नाम से एक प्रतिष्ठित होटल चलाते थे और स्थानीय स्तर पर एक सम्मानित व्यक्ति माने जाते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, होटल में काम करने वाले एक कर्मचारी और ग्राहक के बीच मामूली कहासुनी हुई थी। जब विवाद बढ़ने लगा, तो लिटन घोष अपने कर्मचारी को बचाने के लिए बीच-बचाव करने पहुंचे। लेकिन यही उनका आखिरी कदम साबित हुआ। आरोपियों ने अचानक लिटन घोष पर हमला कर दिया। उन्हें घूंसे-लातों से पीटा गया और बेलचे से सिर पर वार किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़े। स्थानीय लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही लिटन चंद्र घोष की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद पूरे कालिगंज इलाके में शोक और आक्रोश फैल गया।

Bangladesh Hindu Violence
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पुलिस कार्रवाई पर सवाल, तीन आरोपी हिरासत में

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह घटना केवल “मामूली विवाद” नहीं थी, बल्कि इसके पीछे धार्मिक नफरत की मानसिकता भी हो सकती है। स्थानीय हिंदू समुदाय और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच और कड़ी सजा की मांग की है। लोगों का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले अब आम होते जा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।

पेट्रोल पंप कर्मचारी को गाड़ी से कुचला, राजनीति का कनेक्शन 

गाजीपुर की घटना से ठीक एक दिन पहले राजबाड़ी जिले में भी एक और हिंदू युवक की हत्या ने सबको झकझोर कर रख दिया। 30 वर्षीय रिपन साहा, जो गोलांदा मोड़ स्थित एक पेट्रोल पंप पर काम करता था, को कथित तौर पर जानबूझकर गाड़ी से कुचल दिया गया। जानकारी के अनुसार, एक वाहन चालक ने पेट्रोल भरवाने के बाद भुगतान करने से इनकार कर दिया। जब रिपन साहा ने उसे रोकने की कोशिश की, तो चालक ने गुस्से में आकर गाड़ी सीधे उसके ऊपर चढ़ा दी। रिपन की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और वाहन मालिक अबुल हाशेम को गिरफ्तार किया गया है, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की राजबाड़ी जिला इकाई का पूर्व कोषाध्यक्ष बताया जा रहा है। इसके अलावा वाहन चालक कमाल हुसैन को भी हिरासत में लिया गया है।

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बढ़ती हिंसा, घटता भरोसा

इन दो घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बार-बार हो रही हत्याएं, धार्मिक पहचान के आधार पर होने वाले हमले और कमजोर न्याय प्रणाली ने हालात को और गंभीर बना दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी बांग्लादेश सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ रहा है।

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