जब BLO ने निभाया कर्तव्य का सबसे कठिन इम्तिहान: सोती पत्नी को जगाकर थमाया चुनाव आयोग का नोटिस
पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान में एक BLO ने निष्पक्षता की मिसाल पेश की। SIR के तहत उसने खुद को और अपनी पत्नी को चुनाव आयोग का नोटिस जारी किया। जानिए पूरा मामला।
West Bengal SIR BLO Notice Case: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक ईमानदारी और निष्पक्षता की नई मिसाल कायम कर दी है। पूर्वी बर्दवान जिले में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने नियमों का पालन करते हुए न सिर्फ आम नागरिकों बल्कि खुद पर और अपनी पत्नी पर भी वही प्रक्रिया लागू की, जो हर मतदाता के लिए तय है। यह मामला जितना हैरान करने वाला है, उतना ही प्रेरणादायक भी। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक लोग इस घटना पर चर्चा कर रहे हैं और BLO की ईमानदारी की सराहना कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला: जब नोटिस खुद के घर तक पहुंचा
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला पूर्वी बर्दवान जिले के कटवा शहर का है। यहां रहने वाले देबाशंकर चट्टोपाध्याय, जो पेशे से एक प्राइमरी स्कूल शिक्षक हैं, को बूथ नंबर 165 के लिए BLO नियुक्त किया गया है। SIR अभियान के तहत जब मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा था, तब दस्तावेजों की जांच में कुछ तकनीकी और तथ्यात्मक विसंगतियां सामने आईं। इनमें से कुछ गड़बड़ियां देबाशंकर चट्टोपाध्याय के खुद के दस्तावेजों में थीं, जबकि कुछ उनकी पत्नी अनिंदिता चौधरी के फॉर्म में पाई गईं। इन खामियों के आधार पर चुनाव आयोग के आधिकारिक ऐप के माध्यम से दोनों के नाम SIR सुनवाई नोटिस जारी किए गए। खास बात यह रही कि नोटिस जारी करने और उसे संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खुद देबाशंकर पर ही थी।

सोती पत्नी को जगाकर थमाया नोटिस, खुद को भी बनाया पक्षकार
नोटिस जारी होने के बाद देबाशंकर चट्टोपाध्याय ने बिना किसी हिचक या व्यक्तिगत पक्षपात के अपने कर्तव्य का पालन किया। वह चुनाव आयोग का नोटिस लेकर अपने ही घर पहुंचे। दोपहर का समय था और उनकी पत्नी अनिंदिता घर में आराम कर रही थीं। देबाशंकर (Debashankar) ने उन्हें नींद से जगाया और औपचारिक रूप से SIR की सुनवाई का नोटिस थमा दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को भी उसी नोटिस प्रक्रिया में शामिल किया। यह दृश्य देखकर कुछ देर के लिए उनकी पत्नी भी हैरान रह गईं। आमतौर पर लोग ऐसी स्थिति में नियमों को नजरअंदाज करने या अनौपचारिक समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैं, लेकिन देबाशंकर ने इसके उलट उदाहरण पेश किया।
“कानून सबके लिए समान है” – BLO का स्पष्ट संदेश
इस पूरे मामले पर देबाशंकर चट्टोपाध्याय का कहना है कि वह भले ही BLO हों, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों से ऊपर नहीं हैं। उनके शब्दों में, “कानून की नजर में हर नागरिक समान है, चाहे वह मेरा अपना परिवार ही क्यों न हो।” बताया गया है कि उनके दस्तावेजों में उनके पिता के नाम की मात्रा (स्पेलिंग/उच्चारण) में त्रुटि और उपनाम को लेकर विसंगति पाई गई थी। वहीं उनकी पत्नी के फॉर्म में उनके और उनके पिता के बीच उम्र के अंतर को लेकर सवाल उठाया गया था। इन आपत्तियों के समाधान के लिए अब देबाशंकर और उनकी पत्नी दोनों ही अन्य नागरिकों की तरह लाइन में लगकर SIR सुनवाई प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे।
प्रशासन और जनता दोनों कर रहे सराहना
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने देबाशंकर की निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा की खुले तौर पर प्रशंसा की है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे उदाहरण चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा मजबूत करते हैं। वहीं आम लोग भी इस घटना को एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि अगर हर सरकारी कर्मचारी इसी तरह नियमों का पालन करे, तो चुनावी व्यवस्था और ज्यादा पारदर्शी बन सकती है।
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SIR अभियान और इस घटना का महत्व
पश्चिम बंगाल में चल रहा SIR अभियान मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इस प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की सख्त जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की गलती या फर्जीवाड़े को समय रहते सुधारा जा सके। देबाशंकर चट्टोपाध्याय का यह कदम दिखाता है कि SIR सिर्फ एक औपचारिक अभियान नहीं, बल्कि वास्तव में निष्पक्षता और समानता पर आधारित प्रक्रिया है।



