कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड: 12 करोड़ की कार, रईसजादे की रफ्तार और 5 दिन का ड्रामा! सलाखों के पीछे पहुंचा तंबाकू किंग का बेटा शिवम मिश्रा
कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट केस में बड़ी खबर! 5 दिन की लुका-छिपी के बाद पुलिस ने तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को किया गिरफ्तार। जानें 'ड्राइवर' वाली थ्योरी का सच और पूरी इनसाइड स्टोरी।
Kanpur Lamborghini Accident Case: कानपुर (Kanpur News): रफ़्तार, रसूख और रोमांच का एक खतरनाक कॉम्बिनेशन पिछले हफ्ते कानपुर की सड़कों पर देखने को मिला, जिसका अंत अब हवालात की सलाखों के पीछे हुआ है। कानपुर के बहुचर्चित Lamborghini Accident Case में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पिछले पांच दिनों से पुलिस और कानून के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहे मुख्य आरोपी शिवम मिश्रा (Shivam Mishra) को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। शहर के हाई-प्रोफाइल तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा (KK Mishra) के बेटे शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया। यह मामला न केवल 12 करोड़ की सुपरकार की वजह से सुर्खियों में था, बल्कि इसलिए भी क्योंकि हादसे के बाद आरोपी को बचाने के लिए कई तरह की कहानियां रची गई थीं।
हादसे की वो खौफनाक शाम: 12 करोड़ की रफ्तार ने कैसे बरपाया कहर
घटना रविवार, 8 फरवरी की है। कानपुर का पॉश इलाका ग्वालटोली और वहां की वीआईपी रोड (VIP Road), शाम के वक्त हमेशा की तरह गुलजार थी। तभी वहां एक तेज रफ्तार, लाल रंग की चमचमाती लैंबॉर्गिनी कार (Lamborghini Car) तूफ़ान की तरह आई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार की रफ़्तार इतनी ज्यादा थी कि ड्राइवर का उस पर से नियंत्रण पूरी तरह खो चुका था। देखते ही देखते यह लग्जरी कार ‘मौत की मशीन’ बन गई। बेकाबू लैंबॉर्गिनी ने सबसे पहले एक ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि रिक्शा के परखच्चे उड़ गए। इसके बाद कार रुकी नहीं, बल्कि उसने एक बाइक सवार को अपनी चपेट में लिया और फिर पैदल चल रहे एक राहगीर को रौंदते हुए सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से जा टकराई। इस Kanpur Lamborghini Accident ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चूंकि मामला शहर के एक बड़े बिजनेस टायकून के बेटे से जुड़ा था, इसलिए खबर जंगल की आग की तरह फैल गई।

पुलिस की 5 टीमें और ‘ड्राइवर’ वाली थ्योरी का सच
हादसे के बाद जो हुआ, वह किसी फ़िल्मी पटकथा से कम नहीं था। एक्सीडेंट के तुरंत बाद Shivam Mishra मौके से गायब हो गया। जैसे ही पुलिस ने जांच शुरू की, एक नई कहानी सामने आई। बचाव पक्ष की ओर से दावा किया गया कि कार शिवम नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर मोहन लाल चला रहा था। मोहन लाल ने मीडिया के सामने आकर यह बयान भी दिया कि, “साहब (शिवम मिश्रा) की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और वो मेरे ऊपर गिर गए थे, जिससे मेरा बैलेंस बिगड़ गया और हादसा हो गया।” लेकिन पुलिस को यह थ्योरी हजम नहीं हुई। इस मामले में Kanpur Police ने बहुत ही बारीकी से जांच की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक्सीडेंट से जुड़े कुछ वीडियो और सीसीटीवी फुटेज ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। एक वायरल वीडियो में साफ़ तौर पर ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा नजर आ रहे थे। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच विशेष टीमों का गठन किया था। रसूखदार परिवार होने के कारण पुलिस पर भी भारी दबाव था, लेकिन वायरल वीडियो और जन आक्रोश ने पुलिस को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
SHO लाइन हाजिर और हाई-प्रोफाइल ड्रामा: जब पुलिस के हाथ लगे सबूत
इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठे थे। लापरवाही बरतने के आरोप में ग्वालटोली थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) को लाइन हाजिर कर दिया गया था। इसके बाद से जांच की मॉनिटरिंग सीधे वरिष्ठ अधिकारियों (Senior Officials) के हाथों में आ गई। एफआईआर (FIR) में शिवम मिश्रा का नाम नामजद होने के बाद पुलिस ने अपनी दबिश तेज कर दी थी। बताया जाता है कि पुलिस की टीम जब पहली बार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के घर पहुंची, तो उन्हें बंद दरवाजे का सामना करना पड़ा। टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा था, जिसने मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरीं। लेकिन कानून के हाथ आखिरकार आरोपी तक पहुंच ही गए। पांच दिन की फरारी और तमाम कानूनी दांव-पेच के बाद, पुलिस ने शिवम मिश्रा को धर दबोचा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जहाँ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।



