मौत का वो सफर: कर्ज लेकर बुलाई थी ‘हवाई एंबुलेंस’, पर श्मशान में तब्दील हो गया आसमान; झारखंड विमान हादसे की रूह कंपा देने वाली कहानी

झारखंड के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश की दर्दनाक कहानी। कर्ज लेकर किया था इलाज का इंतजाम, लेकिन हादसे ने छीन लीं 7 जिंदगियां। जानिए कैसे एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया।

Jharkhand Air Ambulance Crash: झारखंड (Jharkhand) के चतरा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। कहते हैं कि ‘विपत्ति जब आती है, तो चारों ओर से घेर लेती है’, और लातेहार के संजय कुमार के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिस मरीज की जान बचाने के लिए परिजनों ने अपनी जमापूंजी लगा दी, कर्ज लिया और उम्मीदों का दामन थामा, वही सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। सोमवार (Monday) की शाम चतरा के सिमरिया स्थित करमटांड़ के जंगलों में हुए झारखंड (Jharkhand) एयर एंबुलेंस क्रैश ने न केवल 7 लोगों की जान ले ली, बल्कि दो मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया भी हमेशा के लिए छीन लिया।

ढाबे की आग से शुरू हुआ था बर्बादी का मंजर (The scene of destruction started with the fire in the dhaba)

इस त्रासदी की शुरुआत कुछ दिन पहले पलामू के बकोरिया में हुई थी। यहाँ संजय कुमार (Sanjay Kumar) एक ढाबा चलाते थे। चार दिन पहले उनके ढाबे में अचानक भीषण आग लग गई, जिसमें संजय बुरी तरह झुलस गए। उन्हें तुरंत रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया और हालत नाजुक बताई, तो परिवार ने उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ले जाने का फैसला किया। संजय एक मिलनसार और मृदुभाषी व्यक्ति थे। उनके पिता की हत्या 2004 में नक्सलियों ने कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने शून्य से अपनी जिंदगी शुरू की थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

Jharkhand Air Ambulance Crash
Jharkhand Air Ambulance Crash

इलाज के लिए लिया था ₹8 लाख का कर्ज, दांव पर लगा दी थी जमीन

एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए एयर एंबुलेंस का खर्च उठाना नामुमकिन सा होता है। संजय के भाई अजय ने रुंधे गले से बताया कि भाई की जान बचाने के लिए परिवार ने जमीन बेचने तक का फैसला कर लिया था। चूंकि जमीन तुरंत नहीं बिक सकती थी, इसलिए दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों से हाथ जोड़कर करीब 8 लाख रुपये का इंतजाम किया गया। कुछ पैसे ब्याज पर लिए गए तो कुछ उधार, सिर्फ इस उम्मीद में कि दिल्ली जाकर संजय ठीक हो जाएंगे। सोमवार शाम 7:10 बजे जब रेड बर्ड एविएशन की एयर एंबुलेंस ने रांची से उड़ान भरी, तो परिजनों को लगा कि अब संकट के बादल छंट जाएंगे। लेकिन महज 24 मिनट बाद, रात 7:34 बजे एटीसी से संपर्क टूट गया और खुशियों की उम्मीद मलबे में तब्दील हो गई।

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अनाथ हुए दो मासूम: एक झटके में उजड़ गए 6 घर

चतरा एसपी सुमित अग्रवाल के अनुसार, विमान सिमरिया के घने जंगलों में क्रैश हुआ। इस हादसे में संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, ध्रुव कुमार, दो पायलट और एक डॉक्टर समेत सभी 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने चंदवा के गायत्री मोहल्ले में मातम फैला दिया है। संजय के दो बेटे- 13 वर्षीय शिवम और 17 वर्षीय शुभम- अब पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। जिस आंगन में कल तक भविष्य की योजनाएं बन रही थीं, वहां अब सिर्फ चीखें और सन्नाटा है। संजय की बूढ़ी मां चिंता देवी अपने बेटे और बहू की मौत की खबर सुनकर बेसुध हैं।

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