राहुल गांधी को पीछे बैठाने पर, अब हो गई लालकृष्ण आडवाणी की भी एंट्री

गणतंत्र दिवस 2026 समारोह में राहुल गांधी को पीछे बैठाने पर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने 2014 की लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर साझा कर मोदी सरकार पर प्रोटोकॉल उल्लंघन और अपमान के आरोप लगाए हैं।

Rahul Gandhi Republic Day Controversy: गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को तीसरी पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर सियासी विवाद अब और तेज़ हो गया है। पहले ही भाजपा सरकार पर प्रोटोकॉल तोड़ने और विपक्ष का अपमान करने के आरोप लग रहे थे, अब इस मुद्दे में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की 2014 की एक तस्वीर की एंट्री ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा सरकार ने जानबूझकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे शीर्ष विपक्षी नेताओं को पीछे बैठाकर लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंचाई है।

गणतंत्र दिवस 2026 की तस्वीरों से शुरू हुआ विवाद

विवाद उस समय शुरू हुआ जब गणतंत्र दिवस समारोह की आधिकारिक तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों में राहुल गांधी को केंद्रीय मंत्रियों और सत्ताधारी दल के नेताओं के पीछे वाली कतार में बैठे देखा गया। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होते ही कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। कांग्रेस का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक है और उन्हें पहली पंक्ति में बैठाया जाना चाहिए था। पार्टी नेताओं ने इसे सिर्फ बैठने की व्यवस्था नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करार दिया।

Rahul Gandhi Republic Day Controversy
Rahul Gandhi Republic Day Controversy

2014 की आडवाणी तस्वीर से कांग्रेस का पलटवार

इस विवाद के जवाब में कांग्रेस ने भाजपा के ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की 2014 की एक तस्वीर साझा की। उस समय केंद्र में यूपीए सरकार थी और भाजपा विपक्ष में थी। तस्वीर में आडवाणी सोनिया गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ फ्रंट रो में बैठे दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने यह तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा कि जब 2014 में भाजपा विपक्ष में थी, तब भी शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन किया गया। उन्होंने सवाल किया कि अब ऐसा क्यों नहीं हो रहा?

‘क्या मोदी-शाह विपक्ष का अपमान करना चाहते हैं?’

मणिक्कम टैगोर ने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी का अपमान करना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर विपक्ष के नेताओं का इस तरह अनादर लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि चाहे यूपीए सरकार रही हो या एनडीए, पहले की सरकारों ने हमेशा राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर वरिष्ठ नेताओं और संवैधानिक पदों का सम्मान किया है।

इसे भी पढें: राहुल और खड़गे को पीछे बैठाने पर एक हो गई पूरी कांग्रेस, उड़ा डाली मोदी की धज्जियां

कांग्रेस का बड़ा दावा: पहले की सरकारों में निभाई गई लोकतांत्रिक मर्यादा

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब एनडीए की सरकार थी और आडवाणी ‘मार्गदर्शक मंडल’ का हिस्सा थे, तब भी उन्हें गणतंत्र दिवस जैसे आयोजनों में सम्मानजनक स्थान दिया गया। आडवाणी की 2014 वाली तस्वीर साझा करना कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे वह यह साबित करना चाहती है कि पुरानी सरकारें लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करती थीं। पार्टी का आरोप है कि मौजूदा सरकार विपक्ष को हाशिये पर धकेलने की राजनीति कर रही है।

Related Articles

Back to top button